Himachal Pradesh हाईकोर्ट ने मंदिरों के चढ़ावे पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया
मंदिरों की आय होगी पारदर्शी
दान का गलत उपयोग अब अपराध के दायरे में
चंडीगढ़, 16 अक्टूबर, 2025 (विश्व वार्ता) हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। बता दें कि हिमाचल में मंदिरों की संपत्ति और दान को राज्य सरकार की संपत्ति नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने कहा कि यह धन ‘देवता’ का है, न कि सरकार का, और इसे केवल धार्मिक और आध्यात्मिक उद्देश्यों के लिए ही प्रयोग किया जाना चाहिए। Himachal Pradesh
“कश्मीर चंद बनाम राज्य सरकार” मामले में न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की खंडपीठ ने मंदिर निधियों के दुरुपयोग को “आपराधिक अंधविश्वास” की श्रेणी में रखा। अदालत ने स्पष्ट किया कि मंदिरों के संचालन के लिए नियुक्त न्यासी केवल संरक्षक हैं, मालिक नहीं। इस फैसले के तहत, यदि कोई न्यासी या ट्रस्ट मंदिर की संपत्ति का दुरुपयोग करता है, तो उससे धन की वसूली की जाएगी।
न्यायालय ने मंदिर निधियों के उपयोग को राज्य के बुनियादी ढांचे जैसे सड़कों, पुलों या सरकारी भवनों के निर्माण में लगाने पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया है। साथ ही, इसे किसी भी सरकारी योजना में सम्मिलित करना भी वर्जित किया गया है। Himachal Pradesh
इसके अलावा, मंदिर निधियों को किसी निजी उद्यम या व्यापारिक हित में निवेश करना भी पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है। विशेष व्यक्तियों के स्वागत में दिए जाने वाले उपहार, महंगे प्रसाद और स्मृति चिह्न पर भी रोक लगा दी गई है।
अन्य धर्मों या राजनीतिक आयोजनों में दान वर्जित
अदालत ने स्पष्ट किया कि मंदिर निधि का उपयोग किसी अन्य धर्म या अंतर-धार्मिक आयोजनों, चाहे वे सामाजिक हों या राजनीतिक, में नहीं किया जा सकता। यह मंदिरों की धार्मिक स्वतंत्रता और शुद्धता की रक्षा के लिए आवश्यक बताया गया है। Himachal Pradesh
हाईकोर्ट ने सभी मंदिर प्रबंधन समितियों को आदेश दिया है कि वे प्रत्येक महीने की आय, खर्च, परियोजनाओं की जानकारी और ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करें। ये विवरण मंदिर के सूचना पटों पर या उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किए जाने चाहिए ताकि भक्तों का मंदिर प्रशासन में विश्वास बना रहे।
अधिक समाचार पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें: www.wishavwarta.in























