‘City of Dreams-2 प्रोजेक्ट केस में क्रेडो एसेट्स के डायरेक्टर के खिलाफ नॉन-बेलेबल वारंट
सिटी ऑफ़ ड्रीम्स-2 केस क्या है ?
चंडीगढ, 2 अक्तूबर, 2026 (विश्ववार्ता)सिटी ऑफ़ ड्रीम्स-2 प्रोजेक्ट को लेकर पत्रकार श्रीमित चौधरी की कानूनी लड़ाई में एक अहम अपडेट सामने आया है। खरड़ में सिटी ऑफ़ ड्रीम्स-2 प्रोजेक्ट से जुड़े एक कंज्यूमर केस में, स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन, चंडीगढ़ ने क्रेडो एसेट्स प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर/डायरेक्टर अमनदीप सिंगला के खिलाफ नॉन-बेलेबल अरेस्ट वारंट जारी करने का आदेश दिया है। ‘City of Dreams-2’ project case
यह केस, एग्जीक्यूशन एप्लीकेशन नंबर SC/4/EA/22/2026, जो कंज्यूमर कंप्लेंट नंबर 44 ऑफ़ 2025 से जुड़ा है, 24 सितंबर, 2026 को सुना गया था। कमीशन के आदेश के अनुसार, पहले जारी किया गया बेलेबल वारंट एग्जीक्यूट नहीं किया जा सका। रिपोर्ट के अनुसार, अमनदीप सिंगला दिए गए पते पर नहीं मिले और उन्हें बताया गया कि वह बाहर हैं। कमीशन ने निर्देश दिया है कि नॉन-बेलेबल वारंट SSP चंडीगढ़ के ज़रिए एग्जीक्यूट किया जाए। इसलिए, DSP रैंक से नीचे के ऑफिसर को तैनात न करने को कहा गया है। गिरफ्तारी के बाद अमनदीप सिंगला को तुरंत कमीशन के सामने पेश करने का आदेश दिया गया है। केस की अगली सुनवाई 17 नवंबर, 2026 को होगी।
सिटी ऑफ़ ड्रीम्स-2 केस क्या है ?
इस केस के बैकग्राउंड में, 31 दिसंबर, 2025 को कमीशन ने सिटी ऑफ़ ड्रीम्स प्रोजेक्ट से जुड़ी 8 कंज्यूमर कंप्लेंट का निपटारा किया था। इनमें कंप्लेंट नंबर 44/2025 भी शामिल थी, जिसमें श्रीमती चौधरी और रंजना कुमारी कंप्लेंटर थीं।
कम्प्लेंट में ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट, ओपन सरफेस पार्किंग और मेंटेनेंस चार्ज समेत दूसरी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे। कमीशन ने कहा था कि एग्रीमेंट के मुताबिक, ओपन ऑन-सरफेस पार्किंग दी जानी थी और इसका न होना सर्विस में कमी और अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस माना गया। कमीशन ने पहले जमा किए गए मेंटेनेंस चार्ज का 30 परसेंट और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट में बताई गई पार्किंग मिलने तक बाकी 70 परसेंट मेंटेनेंस चार्ज वापस करने का निर्देश दिया था। इसके अलावा, हर मामले में 75,000 रुपये मुआवजे के तौर पर और 35,000 रुपये कानूनी खर्च के तौर पर देने का भी आदेश दिया गया था।
कमीशन ने ओपन सरफेस पार्किंग देने, सीपेज/क्रैक जैसी कमियों को दूर करने और तीन महीने के अंदर ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट लेने का निर्देश दिया था। अब, पहले के बेलेबल वारंट के एग्जीक्यूट न होने के बाद, नए एग्जीक्यूशन ऑर्डर में नॉन-बेलेबल वारंट जारी किया गया है।
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