International News: अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान में दर्दनाक हादसे ने पूरी दुनिया को झकझोरा
चारों ओर फैली तपती रेत मे पानी व भूख से तडप कर 49 से लोग मौत के मुंह मे समाये
नई दिल्ली, 6 जून (विश्ववार्ता) अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान में एक दर्दनाक हादसे ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। नाइजर में माली से एक धार्मिक उत्सव में शामिल होकर लौट रहे लोगों से भरा एक ट्रक बीच रेगिस्तान में खराब हो गया। भीषण गर्मी और पानी की कमी के कारण यात्री कई दिनों तक फंसे रहे। चारों ओर फैली तपती रेत और जीवनरक्षक संसाधनों के अभाव में 49 लोगों की मौत हो गई। इस भयावह घटना में केवल दो लोग जीवित बच सके, जिन्होंने करीब 50 किलोमीटर पैदल चलकर मदद पहुंचाई और पूरी त्रासदी की जानकारी दुनिया तक पहुंचाई। International News:
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह घटना Tenere Desert क्षेत्र में हुई, जो Assamaka से लगभग 80 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। यात्रियों का ट्रक Talhandek से नाइजर की ओर आ रहा था। यह इलाका सहारा रेगिस्तान के सबसे कठिन और निर्जन क्षेत्रों में गिना जाता है।अधिकारियों के मुताबिक ट्रक बीच रास्ते में खराब हो गया। चालक, उसके सहायकों और यात्रियों ने वाहन ठीक करने की कोशिश की।कई दिनों तक प्रयास जारी रहे, लेकिन ट्रक चालू नहीं हो सका।
🚨 At least 49 people died of thirst after a truck carrying passengers returning from Mali broke down in the Sahara Desert. pic.twitter.com/CBOl7KFOps
— Global News & Geopolitics 🌍 (@GlobalNewsGeo) June 6, 2026
इलाके में पानी या भोजन का कोई स्रोत नहीं था। तापमान बेहद अधिक था और आसपास सहायता पहुंचने का कोई साधन नहीं था। धीरे-धीरे यात्रियों का पानी खत्म हो गया और वे प्यास तथा गर्मी की चपेट में आ गए। इस दर्दनाक घटना में केवल दो लोग जीवित बच पाए। दोनों ने लगभग 50 किलोमीटर से अधिक दूरी पैदल तय कर एक जल स्रोत तक पहुंचने में सफलता हासिल की। इसके बाद वे Assamaka पहुंचे और अधिकारियों को हादसे की सूचना दी। जब बचाव दल मौके पर पहुंचा तो वहां का दृश्य बेहद भयावह था।अधिकारियों ने बताया कि ट्रक के नीचे और आसपास दर्जनों शव पड़े मिले। कई लोग वाहन की छाया में बचने की कोशिश करते हुए दम तोड़ चुके थे। बचाव दल ने मृतकों को सामूहिक कब्रों में दफनाया। यह क्षेत्र अफ्रीका से यूरोप की ओर जाने वाले प्रवासियों और शरणार्थियों का प्रमुख मार्ग माना जाता है। मानवीय संगठनों के अनुसार हर वर्ष:
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