
नेपाल में पहली तबाही के बाद अब ‘दूसरी प्रलय’ का खतरा Himachal Pradesh में भी ?
हिमाचल के लिए खतरा बनीं ग्लेशियल झीलें, नेपाल त्रासदी जैसे बन सकते हैं हालात
दिल्ली, 28 अगस्त, 2026 (विश्ववार्ता) नेपाल में आई भयानक प्राकृतिक आपदा के बाद अब हिमाचल प्रदेश में भी ग्लेशियल झीलों को लेकर चिंता बढ़ गई है। हिमाचल विधानसभा के मानसून सेशन के दौरान क्लाइमेट चेंज और बढ़ती ग्लेशियल झीलों से पैदा होने वाले संभावित खतरों पर गंभीर चर्चा हुई। Nepal Flash Flood
रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2019 में हिमाचल प्रदेश में ग्लेशियल झीलों की संख्या करीब 562 थी, जो अब बढ़कर 1,000 से ज़्यादा बताई जा रही है। इनमें से देश की सबसे सेंसिटिव और हाई-रिस्क झीलों में से 48 हिमाचल प्रदेश में हैं।
सैटेलाइट स्टडीज़ के मुताबिक, राज्य के अलग-अलग नदी जलाशयों में ग्लेशियल झीलों की संख्या और फैलाव लगातार बढ़ रहा है। सतलुज बेसिन में 750 से ज़्यादा, चिनाब में 250 से ज़्यादा, ब्यास में 90 से ज़्यादा और रावी जलाशय में 60 से ज़्यादा ग्लेशियल झीलें हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस स्थिति को क्लाइमेट संकट का एक गंभीर और साफ़ संकेत बताया है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते तापमान के कारण हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियर तेज़ी से पिघल रहे हैं, जिससे ग्लेशियल झीलों के फटने और अचानक बाढ़ आने का खतरा बढ़ सकता है। Nepal disaster increased concern about glacial lakes in himachal
सरकार संभावित खतरे वाले इलाकों की निगरानी और बचाव के उपायों के बारे में एक्सपर्ट्स से लगातार चर्चा कर रही है। सरकार का कहना है कि क्लाइमेट चेंज के कारण पहाड़ी इलाकों में पैदा हो रही नई चुनौतियों से निपटने के लिए समय पर और सोच-समझकर कदम उठाना बहुत ज़रूरी है।
और खबरें पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें: https://wishavwarta.in/























