माता-पिता को बच्चों को प्रॉपर्टी से बेदखल करने का अधिकार है: Supreme Court
माता-पिता और सीनियर सिटीजन के हित में फैसला
चंडीगढ़, 19 अगस्त (विश्व वार्ता) – सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है कि सीनियर सिटिजन की देखभाल, सुरक्षा और सम्मान पक्का करने के लिए ट्रिब्यूनल बच्चों को प्रॉपर्टी से बेदखल करने का आदेश दे सकता है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें बेटे और बहू को प्रॉपर्टी से बेदखल करने के ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द कर दिया गया था। Supreme Court allows parents to evict children
कोर्ट ने कहा कि बढ़ती उम्र अनदेखी, असुरक्षा या बेइज्जती का कारण नहीं होनी चाहिए। कोर्ट के मुताबिक, किसी भी सभ्य समाज की पहचान इस बात से तय होती है कि वह अपने बुजुर्गों को कितनी इज्ज़त, सम्मान और सुरक्षा देता है। यह फैसला मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिजन एक्ट, 2007 के तहत ट्रिब्यूनल की शक्तियों से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अगर बुजुर्गों की सुरक्षा या देखभाल के लिए ज़रूरी हो तो ट्रिब्यूनल बेदखली का आदेश दे सकता है।
यह मामला लखनऊ के रविकांत गुप्ता से जुड़ा था। उनकी 81 साल की मां को कथित तौर पर घर छोड़कर ओल्ड एज होम में रहने के लिए मजबूर किया गया था। ट्रिब्यूनल ने उनके बेटे और बहू को घर खाली करने का आदेश दिया था, लेकिन इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आदेश को रद्द कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के घर खाली करने के आदेश को बहाल कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि बुजुर्ग माता-पिता की प्रॉपर्टी में रहने वाले बच्चों के अधिकार उनके माता-पिता की सुरक्षा, देखभाल और सम्मान से ऊपर नहीं हो सकते।
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