
🪷🌸 *हुकमनामा श्री हरमंदिर साहिब अमृतसर*
🪷🌸Amrit Vele Da Hukamnama Sri Darbar Sahib | February | Date 21-02-2026 | Ang 500
*गूजरी महला ५ ॥*
*कबहू हरि सिउ चीतु न लाइओ ॥ धंधा करत बिहानी अउधहि गुण निधि नामु न गाइओ ॥१॥ रहाउ ॥ कउडी कउडी जोरत कपटे अनिक जुगति करि धाइओ ॥ बिसरत प्रभ केते दुख गनीअहि महा मोहनी खाइओ ॥१॥ करहु अनुग्रहु सुआमी मेरे गनहु न मोहि कमाइओ ॥ गोबिंद दइआल क्रिपाल सुख सागर नानक हरि सरणाइओ ॥२॥१६॥२५॥*
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अर्थ: (हे भाई! जो व्यक्ति माया में आसक्त है) वह कभी भी अपने मन को भगवान के चरणों से नहीं जोड़ता। (माया के लिए) उसका जीवन भागते-दौड़ते बीत जाता है, वह सभी गुणों के खजाने भगवान का नाम नहीं जपता। 1. वह एक-एक करके छल करके माया को इकट्ठा करता रहता है, वह तरह-तरह के तरीके अपनाकर माया के लिए भागता-दौड़ता रहता है।
भगवान का नाम भूल जाने के कारण उसे अनेक दुख आते हैं। मन को मोहित करने वाली शक्तिशाली माया उसके आध्यात्मिक जीवन को खा जाती है। 1. हे नानक! कहो-) हे गोबिंद! हे दयालु! हे कृपालु! हे सुख के सागर! हे प्रभु! मैं आपकी शरण में आया हूँ। हे मेरे प्रभु! मुझ पर दया करो, मेरे किए हुए कर्मों पर ध्यान मत दो। 2.16.25.*



















