🪷🌸Amrit Vele Da Hukamnama Sri Darbar Sahib | February | Date 16-02-2026 | Ang 806
बिलावलु महला ५ ॥
स्रब निधान पूरन गुरदेव ॥१॥ रहाउ ॥ हरि हरि नामु जपत नर जीवे ॥ मरि खुआरु साकत नर थीवे ॥१॥ राम नामु होआ रखवारा ॥ झख मारउ साकतु वेचारा ॥२॥ निंदा करि करि पचहि घनेरे ॥ मिरतक फास गलै सिरि पैरे ॥३॥ कहु नानक जपहि जन नाम ॥ ता के निकटि न आवै जाम ॥४॥१३॥१८॥
अर्थ: हे भाई! पूरे गुरू की शरण पड़ने से सारे खजानों का मालिक प्रभू मिल जाता है।1। रहाउ।
(गुरू की शरण पड़ कर) परमात्मा का नाम जपने से मनुष्य आत्मिक जीवन तलाश लेते हैं। पर परमात्मा से टूटा हुआ मनुष्य बेचारा (उसकी निंदा आदि करने के लिए) झखें मारता है (पर उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकता)।2।
अनेकों लोग (हरी-नाम का सिमरन करने वाले मनुष्य की) निंदा कर-कर के (बल्कि) परेशान (ही होते) हैं। (आत्मिक) मौत की फाही उनके गले में उनके पैरों में पड़ी रहती है, आत्मिक मौत उनके सिर पर सवार रहती है।3।
हे नानक! (बेशक) कह- जो मनुष्य परमात्मा का नाम जपते हैं, जम भी उनके नजदीक नहीं फटक सकता।4।13।18।