‘दो से अधिक बच्चे होने पर चुनाव न लड़ने देने वाले कानूनों की अब जरूरत नहीं’, सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
चंडीगढ, 4 नवंबर (विश्ववार्ता) सुप्रीम कोर्ट ने उन कानूनों पर सवाल उठाया है जो दो से ज़्यादा बच्चे होने पर उम्मीदवारों को लोकल बॉडीज़ के चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराते हैं। कोर्ट ने कहा कि देश में बदलते डेमोग्राफिक ट्रेंड्स के कारण, ऐसी पाबंदियों के पीछे का तर्क अब बेमतलब होता जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साल 2003 में, भारत का टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) 3 था। उस समय, कोर्ट ने ‘जावेद बनाम हरियाणा राज्य’ मामले में दो बच्चों की ज़रूरत की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था। हालांकि, देश का टोटल फर्टिलिटी रेट अब घटकर 1.9 हो गया है।
कोर्ट ने यह भी बताया कि देश का फर्टिलिटी रेट अब 2.1 के रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे आ गया है। इस ट्रेंड की वजह से, आने वाले समय में देश को ऐसे डेमोग्राफिक बदलाव का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें बुज़ुर्ग आबादी का हिस्सा बढ़ेगा और काम करने की उम्र के लोगों का हिस्सा घटेगा।
सुप्रीम कोर्ट की इन बातों से लोकल चुनावों में दो से ज़्यादा बच्चे होने पर लगाई गई अयोग्यता की शर्तों पर नई चर्चा शुरू हो सकती है। हालांकि, इन बातों को ऐसे कानूनों को रद्द करने का आखिरी फैसला नहीं माना जा सकता।
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