Lal Sagar में संकट: केबल कटते ही धीमा पड़ा Internet
नीचे बिछी महत्वपूर्ण सबमरीन केबल्स अचानक डैमेज
किस-किस देश में हुआ असर ?
कितना बड़ा है यह खतरा ?
चंडीगढ, 10 सिंतबर (विश्ववार्ता) इंटरनेट ट्रैफिक मॉनिटरिंग संस्था NetBlocks और कई तकनीकी विशेषज्ञों ने पुष्टि की कि रेड सी (Red Sea) के नीचे बिछी महत्वपूर्ण सबमरीन केबल्स अचानक डैमेज हो गईं। ये केबल्स सामान्यतः डेटा ट्रैफिक के लिए रीढ़ की हड्डी मानी जाती हैं और इनकी क्षति से वैश्विक नेटवर्क व्यवस्था पर गहरा असर पड़ता है।
में संकता: Internet slowed down as cable was cut
–SMW4 (South East Asia–Middle East–Western Europe 4) संचालित: टाटा कम्युनिकेशंस
–IMEWE (India–Middle East–Western Europe)
–FALCON – संचालित: GCX (Global Cloud Xchange)
दुनिया के करीब 95% इंटरनेशनल इंटरनेट ट्रैफिक इन्हीं सबमरीन केबल्स के जरिए संचालित होता है।
किस-किस देश में हुआ असर?
भारत
–इंटरनेट की स्पीड में अस्थायी गिरावट
–आईटी और SaaS सेक्टर में कुछ नेटवर्क डिले की शिकायतें
प्रभावित क्षेत्र: मुंबई, चेन्नई, दिल्ली NCR
पाकिस्तान
–PTCL ने सेवा बाधित होने की पुष्टि की
–ऑनलाइन सेवाओं की उपलब्धता में गंभीर रुकावट
UAE
–Du और Etisalat के यूजर्स ने दर्ज कराईं इंटरनेट स्लोडाउन की शिकायतें
–फिनटेक कंपनियों और स्ट्रीमिंग सर्विसेज पर असर
कुवैत
–FALCON केबल के क्षतिग्रस्त होने से नेटवर्क में रुकावट
–बैंकिंग सेक्टर और सरकारी पोर्टल्स प्रभावित
मरम्मत कब तक होगी?
–समुद्र में गहराई पर स्थित केबल्स की मरम्मत में 2–4 हफ्ते लग सकते हैं
–इसके लिए स्पेशल केबल रिपेयर शिप्स, समुद्री इंजीनियर और रिमोट ऑपरेटेड रोबोट्स की मदद ली जाएगी
–खराब मौसम और संघर्ष क्षेत्रों के कारण मरम्मत में देरी की आशंका
साजिश या संयोग?
हालांकि तकनीकी खराबी या एंकर से क्षति जैसी संभावनाएं सामान्य हैं, लेकिन रेड सी क्षेत्र में चल रहे युद्ध और सैन्य टकरावों को देखते हुए जानबूझकर की गई तोड़फोड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा।
फिर सवालों के घेरे में हूती विद्रोही
–ईरान समर्थित हूती विद्रोही पिछले सालभर से रेड सी में शिपिंग रूट्स पर हमलों को अंजाम दे रहे हैं
–4 जहाज डूबे, कई नाविकों की मौत
–हालांकि हूती गुट ने इस घटना की ज़िम्मेदारी से इनकार किया है, उन्होंने अपने चैनल अल-मसीराह पर NetBlocks की रिपोर्ट जरूर साझा की
यमन सरकार का सीधा आरोप
यमन के सूचना मंत्री मोअम्मर अल-एरयानी ने कहा, “यह हमला सिर्फ इजराइल या अमेरिका का नहीं, बल्कि पूरे डिजिटल विश्व पर है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब तय करना होगा – क्या वे इंटरनेट को सुरक्षित रखना चाहते हैं या नहीं।” उन्होंने इसे “डिजिटल आतंकवाद” करार दिया और UN और ITU (International Telecommunication Union) से तत्काल जांच की मांग की।
कितना बड़ा है यह खतरा ?
–ग्लोबल इंटरनेट नेटवर्क की कमजोर कड़ी उजागर
–बैंकिंग, फिनटेक, हेल्थकेयर, शिक्षा और सरकारी सेवाएं प्रभावित
–यह घटना दर्शाती है कि भविष्य के युद्ध अब केबल्स और डेटा सेंटरों पर भी हो सकते हैं
क्या आगे होगा?
–इंटरनेशनल टेलीकॉम ऑपरेटर्स अब बैकअप रूट्स के ज़रिए डेटा ट्रैफिक डायवर्ट कर रहे हैं
–भारत, UAE और यूरोप में नेटवर्क रीडिजाइन और सिक्योरिटी प्रोटोकॉल की समीक्षा शुरू
–यह घटना आने वाले वर्षों में “साइबर वॉरफेयर की नई परिभाषा” बन सकती है























