Prime Minister Narendra Modi आज देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर करेगें रवाना
हरियाणा देश का पहला हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाला बनेगा राज्य
जानिए क्या है ख़ासियत
चंडीगढ, 16 जुलाई, 2026 (विश्ववार्ता) कल यानी 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर उसका उद्घाटन करेंगे । जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली यह ट्रेन पूरी तरह स्वदेशी है जो प्रदूषण मुक्त ईंधन तकनीक (हाइड्रोजन फ्यूल-सेल) का इस्तेमाल करती है।
इसके साथ ही भारत उन देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहां हाइड्रोजन फ्यूल-सेल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है.यह ट्रेन न तो बिजली की ओवरहेड लाइन पर निर्भर होगी और न ही डीज़ल इंजन पर.ऐसे में सवाल उठता है कि इसका इंजन कैसे काम करेगा, इसके पीछे की तकनीक क्या है और भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना की खासियत क्या है? मई में भारतीय रेल ने उत्तर रेलवे के जींद–सोनीपत सेक्शन पर 10 कोच वाली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन चलाने को मंजूरी दी थी।
यह ट्रेन 1200 किलोवाट क्षमता वाले हाइड्रोजन फ्यूल-सेल प्रोपल्शन सिस्टम से संचालित होगी और इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा होगी. जींद से सोनीपत के बीच एक तरफ की दूरी क़रीब 90 किलोमीटर है, जिसे यह ट्रेन क़रीब 2 घंटे में तय करेगी। रेल मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, यह सेवा ट्रेन संख्या 74010 और 74009 के रूप में संचालित होगी।
ट्रेन संख्या 74010 सुबह 7:40 बजे जींद से रवाना होगी और 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी. इसी तरह ट्रेन संख्या 74009 10:40 बजे सोनीपत से रवाना होगी और दोपहर 1:00 बजे जींद पहुंचेगी.हाइड्रोजन फ्यूल ट्रेन जींद सिटी, पांडू पिंडारा, ललित खेड़ा, भांपेगा, ईशापुर खेड़ी, बुटाना, खांडराई, गोहाना, राबड़ा, लाठ, मोहाना और बरवासनी स्टेशनों पर रुकेगी.इस तरह यह ट्रेन दिन में दो फेरे लगाएगी और हर रोज़ कुल क़रीब 356 किलोमीटर की दूरी तय करेगी. हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन में एक समय में कुल 682 यात्री सफर कर सकेंगे.यहां एक सवाल यह भी है कि क्या हाइड्रोजन फ्यूल ट्रेनों को चलाने के लिए किसी ख़ास तरह की पटरी बनाई गई है या इसके लिए कोई अलग ट्रैक होगा तो इसका जवाब है, “नहीं”.हाइड्रोजन ट्रेन सामान्य पटरियों पर ही चल सकती हैं. इसके लिए अलग ट्रैक बनाने की आवश्यकता नहीं होती।
रेलवे के अनुसार, इन ट्रेनों में हाइड्रोजन भरने के लिए जींद में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र स्थापित किया गया है.यहां पानी को इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है. इसके बाद तैयार हाइड्रोजन को उच्च दबाव वाले टैंकों में जमा किया जाता है और वहीं बनाए गए विशेष फ्यूलिंग साइडिंग/स्टेशन पर ट्रेन में भरा जाता है।
इसके लिए सामान्य रेलवे स्टेशनों पर अलग से फ्यूल स्टेशन नहीं बनाए गए हैं. पायलट परियोजना के तहत जींद में ही यह विशेष सुविधा विकसित की गई है। पीआईबी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) ने इस जगह पर कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस के भंडारण और वितरण के लिए आवश्यक लाइसेंस जारी कर दिया है. रीफ्यूलिंग के लिए एक हाइड्रोजन कंप्रेशन सिस्टम उपलब्ध कराया गया है।
रेल मंत्रालय के मुताबिक, हाइड्रोजन गैस भरने की प्रक्रिया को सुचारु और निर्बाध बनाए रखने के लिए एक हाइड्रोजन कंप्रेशन सिस्टम (गैस को उच्च दबाव पर कंप्रेस्ड करने वाली मशीन) लगाया गया है.इसके साथ ही आवश्यक तकनीकी सहायता और ज़रूरी स्पेयर पार्ट्स भी उपलब्ध कराए गए हैं. इसके अलावा, आपातकालीन स्थिति के लिए एक अतिरिक्त कंप्रेसर की व्यवस्था भी की जा रही है।
भारतीय रेल के अनुसार, वर्तमान में दुनिया के कुछ चुनिंदा देश-जैसे जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका-हाइड्रोजन फ्यूल-सेल ट्रेनों का संचालन कर रहे हैं या उनका परीक्षण कर रहे हैंभारत भी अब इस ट्रेन के संचालन के साथ उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। और खबरें पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें: https://wishavwarta.in/
























