
Health Tips पूरे शरीर को भीतर से संतुलित और मजबूत बनाती है हरड़
हालांकि हरड़ जितनी फायदेमंद, उतनी ही सावधानी भी जरूरी
नई दिल्ली , 17 फरवरी,(विश्ववार्ता)Health Tips आयुर्वेद में हरड़ (हरितकी) को ‘अमृत’ के समान माना गया है। इसकी वजह यह है कि हरड़ सिर्फ किसी एक बीमारी पर काम नहीं करती, बल्कि पूरे शरीर को भीतर से संतुलित और मजबूत बनाती है। चरक संहिता में इसे त्रिदोष नाशक बताया गया है, यानी यह वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को संतुलन में रखती है।
हरड़ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह शरीर की जरूरत के हिसाब से काम करती है। अगर किसी को कब्ज है, तो यह आंतों की सफाई करती है और अगर दस्त की प्रवृत्ति है, तो आंतों को मजबूत बनाती है। यही वजह है कि इसे एक एडाप्टोजेनिक हर्ब कहा जाता है।
हरड़ शरीर का ‘स्मार्ट मैकेनिक’ है जो जहां गड़बड़ी होती है, वहीं सुधार शुरू कर देती है। पेट से जुड़ी ज्यादातर समस्याओं जैसे गैस, अपच, एसिडिटी और भारीपन में हरड़ बेहद असरदार मानी जाती है।
आयुर्वेद के अनुसार, बीमारी की जड़ शरीर में जमा आम होता है, यानी अधपचा और विषैला पदार्थ। हरड़ इस आम को बाहर निकालने का काम करती है। जब शरीर साफ होता है, तो उसका असर त्वचा, बाल और आंखों पर भी साफ दिखाई देता है। चेहरे की रंगत सुधरना, मुंह के छाले ठीक होना और बालों का झड़ना कम होना ये सब हरड़ के नियमित और सही उपयोग से संभव है। यही कारण है कि आयुर्वेद में इसे रसायन की श्रेणी में रखा गया है, जो शरीर को अंदर से नया बनाती है।Health Tips
हरड़ को अमृत कहे जाने का एक बड़ा कारण इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना भी है। बदलते मौसम में बार-बार सर्दी-जुकाम होना, गले में कफ जमना या जल्दी थक जाना, इन सब में हरड़ शरीर की रक्षा ढाल की तरह काम करती है। यह लिवर को भी मजबूत करती है, जिससे खून साफ रहता है और ऊर्जा बनी रहती है।
हालांकि हरड़ जितनी फायदेमंद है, उतनी ही सावधानी भी जरूरी है। बहुत अधिक मात्रा लेने से दस्त या कमजोरी हो सकती है। गर्भवती महिलाओं और बहुत ज्यादा कमजोर लोगों को इसका सेवन बिना वैद्य की सलाह के नहीं करना चाहिए। Health Tips
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