
पंजाब 29 मार्च 1849 को खोए हुए सिख राज के लिए देश आज भी कर रहा है संघर्ष : गुरिंदर सिंह बाजवा
चंडीगढ़, 28 मार्च, (विश्व वार्ता) 29 मार्च 1849 की सुबह, सूरज निकलने से पहले, लाहौर दरबार के ऊपर खालसा का झंडा लहरा रहा था। सूरज निकलते ही अंग्रेजों ने 10 साल के महाराजा दलीप सिंह से सिख राज यह कहकर छीन लिया कि जब महाराजा बड़े हो जाएंगे, तो तुम्हारा राज वापस कर दिया जाएगा। अंग्रेजों ने उसी दिन किले से खालसा राज का झंडा उतार दिया। 1854 में, जब महाराजा दलीप सिंह बड़े हो गए, तो अंग्रेजों ने राज वापस करने से मना कर दिया। देश आज भी उस खोए हुए सिख राज को वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहा है। ये विचार बेगमपुरा खालसा राज पार्टी के प्रेसिडेंट गुरिंदर सिंह बाजवा ने कहे। punjab latest hindi news,
उन्होंने कहा कि 1947 से पहले गांधी, नेहरू और पटेल ने सिख नेताओं को धोखा दिया कि तुम भारत को अंग्रेजों से आज़ाद कराने में हमारा साथ दो। आज़ादी के बाद आपको ऐसा इलाका दिया जाएगा। जिसमें आप अपनी आज़ादी बनाए रख सकेंगे। सिख नेताओं ने उन पर भरोसा किया और भारत को आज़ाद कराने के लिए अंग्रेजों के खिलाफ़ बड़े पैमाने पर जंग लड़ी और भारत को आज़ाद कराने के लिए 80 परसेंट कुर्बानियां सिखों ने दीं।
आज़ादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को सिख नेता मास्टर तारा सिंह ने अपने वादे के मुताबिक सिखों को एक आज़ाद इलाका देने की बात याद दिलाई, तो नेहरू ने मास्टर जी से कहा कि अब आपको यह भूल जाना चाहिए। यह मेरे हिंदुस्तान को आज़ाद कराने के लिए आपकी मदद लेने की एक राजनीतिक चाल थी। अब अगर आप एक आज़ाद इलाके की मांग करेंगे, तो मैं आपसे सख्ती से निपटूंगा। नेहरू ने उस समय के कांग्रेसी सिख नेताओं से यह भी कहा था कि जो भी सिख इलाके की बात करेगा। उसके खिलाफ़ कार्रवाई की जाएगी। इस पर कई सिख नेताओं ने सिख इलाके का मुद्दा छोड़ दिया और नेहरू के साथ राज्य के बंटवारे में हिस्सेदार बन गए।
बाजवा ने आगे कहा कि सिख समुदाय आज भी नेहरू, गांधी और पटेल द्वारा सिखों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। इस मौके पर बाबा गुरमेज सिंह डबावला, एडवोकेट इंदरजीत सिंह, जसविंदर सिंह कथावाचक, इंस्पेक्टर निर्मल सिंह, सुखदे सिंह जर्मन, सिमरनजीत सिंह आदि मौजूद थे। punjab latest hindi news,
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