
नवांशहर में जन्मी 27 सप्ताह की बच्ची ने ”Chief Minister’s Health Scheme’.’ के तहत मिली 50 दिनों की विशेष एनआईसीयू देखभाल के बाद मौत को दी मात
भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ ने 700 ग्राम वजन की समय से पहले जन्मी बच्ची की बचाई जान, 3 लाख रुपये का कैशलेस इलाज मुहैया करवाया
किसी भी परिवार को जान बचाने के लिए इलाज के पैसे इकट्ठे करने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा : डॉ. बलबीर सिंह
नवजात शिशुओं के इलाज के लिए 6.28 करोड़ रुपये के क्लेमाें के साथ पंजाब में 4,400 से अधिक नवजात शिशुओं की जान बचाने में मिली मदद
‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ न होती तो हम इस इलाज का खर्च कभी नहीं उठा सकते थे: सूरज, बच्ची के पिता
चंडीगढ़; , 1 अगस्त, 2026 (विश्ववार्ता) भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ (एमएमएसवाई) ने नवांशहर में समय से लगभग तीन महीने पहले जन्मी एक बच्ची की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई है। गर्भावस्था के केवल 27वें सप्ताह में और मात्र 700 ग्राम वजन वाली इस बच्ची को एक सूचीबद्ध निजी अस्पताल के नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में 50 दिनों तक विशेष इलाज दिया गया। लगभग 3 लाख रुपये की लागत वाला सारा इलाज योजना के तहत पूरी तरह से कैशलेस मुहैया करवाया गया। A baby girl born at 27 weeks in Nawanshahr defeated death after receiving 50 days of specialized NICU care under the ‘Chief Minister’s Health Scheme’.
पंजाब के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह मामला दर्शाता है कि मुख्यमंत्री सेहत योजना हर परिवार को इलाज के खर्च की चिंता के बिना उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवा रही है। उन्होंने कहा, “किसी भी परिवार को जान बचाने और इलाज के लिए पैसे इकट्ठे करने के बीच चयन करने की जरूरत नहीं है। हर मां सुरक्षित प्रसव की हकदार है और हर नवजात शिशु को जीवन जीने का पूरा मौका मिलना चाहिए।”
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “यह मामला पंजाब में उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं और नवजात शिशुओं के इलाज में मुख्यमंत्री सेहत योजना के बढ़ते उपयोग को भी दर्शाता है। आंकड़े बताते हैं कि उच्च जोखिम वाले प्रसवों से संबंधित दावों में सबसे बड़ा हिस्सा नवजात शिशुओं की देखभाल का है। पिछले सात महीनों के दौरान ‘स्पेशल नियोनेटल केयर पैकेज’ के तहत 1,869 नवजात शिशुओं को 2.50 करोड़ के दावों का लाभ मिला है, जबकि ‘इंटेंसिव नियोनेटल केयर पैकेज’ के तहत 1,719 नवजात शिशुओं के इलाज के लिए 3.78 करोड़ रुपये के क्लेम स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा, ‘एडवांस्ड नियोनेटल केयर पैकेज’ के तहत 434 और ‘क्रिटिकल केयर नियोनेटल पैकेज’ के तहत 382 मामलों को भी योजना का लाभ मिला है, जिससे गंभीर जटिलताओं के साथ पैदा हुए शिशुओं को जीवन-रक्षक इलाज मुहैया करवाया गया। मुख्यमंत्री सेहत योजना न केवल लोगों की जान बचा रही है, बल्कि उनके इलाज का आर्थिक बोझ भी कम कर रही है।”
यह बच्ची 9 जून 2026 को नवांशहर के शिव शंकर मोहल्ला निवासी सूरज और उनकी पत्नी के घर जन्मी थी। जन्म के तुरंत बाद फेफड़े पूरी तरह से विकसित न होने के कारण उसे सांस लेने में गंभीर समस्या हो गई। डॉक्टरों ने तुरंत उसे एनआईसीयू में भर्ती करके वेंटिलेटर पर रखा और अगले 50 दिनों तक उसकी लगातार निगरानी और इलाज किया।
अपनी मेडिकल टीम के साथ मिलकर बच्ची का इलाज करने वाले डॉ. हरतेश सिंह पाहवा ने बताया कि इतनी कम गर्भावधि में जन्म लेने वाले शिशु बहुत नाजुक होते हैं और उन्हें चौबीसों घंटे विशेष चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा, “उन्नत नियोनेटल उपचार, उचित पोषण, संक्रमण नियंत्रण और लगातार निगरानी की बदौलत बच्ची की हालत धीरे-धीरे सुधरती गई और आखिरकार उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत लगभग 3 लाख रुपये के पूरे इलाज का खर्च उठाया गया, जिससे परिवार अस्पताल के बिलों की चिंता करने की बजाय अपनी बेटी के ठीक होने पर ध्यान केंद्रित कर सका।”
अपनी भावनाएं साझा करते हुए बच्ची के पिता सूरज ने कहा कि उनके परिवार के लिए इतनी बड़ी राशि का प्रबंध करना असंभव था। उन्होंने कहा, “कई ऐसे पल आए जब हमें लगा कि हम अपनी बेटी को खो देंगे। डॉक्टरों ने हमें उम्मीद दी और सरकार की इस योजना ने हमें कभी भी पैसों की चिंता नहीं करने दी। आज हम अपनी बेटी को घर ले जा रहे हैं क्योंकि मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से, पंजाब सरकार हमारे सबसे मुश्किल समय में हमारे साथ खड़ी रही।”
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं से संबंधित 474 माताओं को भी लाभ मिला है। इनमें मां और गर्भ में पल रहे शिशु से संबंधित गंभीर स्थितियां, समय से पहले प्रसव के 70 मामले, गंभीर खून की कमी के 45 मामले, गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया/एक्लेम्पसिया के 19 मामले और भ्रूण की गंभीर जन्मजात विकृतियों के दो मामले शामिल हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकार समय पर कैशलेस इलाज मुहैया करवाकर माताओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
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