सेना के बाद BSF का भी बदलेगा यूनिफॉर्म
नई ड्रेस में कौन-कौन से रंग होंगे ?
चंडीगढ़, 31 मई (विश्व वार्ता): आप अगर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के जवानों को शानदार कॉम्बैट ड्रेस में देखें तो कृपया चौंकिएगा नहीं, क्योंकि अब बीएसएफ का कॉम्बैट ड्रेस बदल रहा है आप आने वाले समय में बीएसएफ (बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स) के जवानों को एक नई तरह की वर्दी (कॉम्बैट ड्रेस) में देखें, तो हैरान मत होइए। बीएसएफ अब अपनी पुरानी ड्रेस की जगह एक नई डिज़ाइन वाली डिजिटल पैटर्न वाली ड्रेस अपना रही है। सेना और सीआरपीएफ की तरह BSF का कॉम्बैट ड्रेस डिजिटल पैटर्न का होगा। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है और एक साल के भीतर पूरा का पूरा BSF नये कॉम्बैट ड्रेस में दिखेगा। इसमें 50 फीसदी खाकी , 45 फीसदी ग्रीन , 5 फीसदी ब्राउन कलर होगा।
बीएसएफ ने अपना यह कॉम्बैट ड्रेस का डिजाइन इनहाउस डेवलप किया है. करीब एक से डेढ़ साल तक बीएसएफ के अधिकारियों ने इसपर मेहनत की. अब जाकर स्थिति यह है कि बीएसएफ ने अपने डिजिटल प्रिंट का पेटेंट भी करवा लिया है. केवल प्रिंट का ही नही बल्कि ड्रेस के सिलाई का भी. बिना बीएसएफ के इजाजत के कोई भी आदमी न तो इस डिजिटल प्रिंट का कुछ पहन पायेगा और ना ही ऐसा कोई स्टिचिंग भी करवा पायेगा. अगर कोई आदमी ऐसा कुछ गैरकानूनी कॉपी करेगा तो सीधे उसे जेल होगी.
2 लाख 70 हजार क्षमता वाली बीएसएफ पाकिस्तान के साथ साथ बांग्लादेश बॉर्डर पर तैनात है. सरहद के साथ-साथ बीएसएफ नक्सल विरोधी अभियान, उग्रवाद और आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी शामिल है.
पहले की ड्रेस पर पैटर्न कपड़े के ऊपर छपाई से बनाया जाता था।
अब डिजिटल प्रिंट फाइबर के अंदर तक होगा, जिससे यह प्रिंट लंबे समय तक टिकेगा और जल्दी खराब नहीं होगा।
बीएसएफ ने खुद डिज़ाइन किया है यह ड्रेस
इस नई ड्रेस का डिज़ाइन बीएसएफ ने खुद अपने स्तर पर तैयार किया है।
एक से डेढ़ साल तक अधिकारियों ने इसपर मेहनत की है।
बीएसएफ ने इस डिजिटल प्रिंट और ड्रेस की सिलाई का पेटेंट भी करा लिया है।
बिना इजाजत कोई नहीं बना सकता यह ड्रेस
यह डिज़ाइन और पैटर्न अब बीएसएफ की कानूनी संपत्ति है।
बिना बीएसएफ की मंजूरी के कोई व्यक्ति इस तरह की ड्रेस नहीं बना सकता और न ही पहन सकता है।
अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी और उसे जेल भी हो सकती है।
बीएसएफ कहां-कहां तैनात है?
बीएसएफ की कुल ताकत लगभग 2 लाख 70 हजार जवानों की है
ये जवान पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमा पर तैनात हैं। इसके अलावा ये नक्सल, आतंकवाद और उग्रवाद विरोधी अभियानों में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं।























