
🪷🌸 Amrit Vele Da हुकमनामा श्री हरमंदिर साहिब अमृतसर*
🪷🌸Amrit Vele Da Hukamnama Sri Darbar Sahib | June | Date 03-06-2026 | Ang 828
बिलावलु महला ५ ॥ जिउ भावै तिउ मोहि प्रतिपाल ॥ पारब्रहम परमेसर सतिगुर हम बारिक तुम्ह पिता किरपाल ॥१॥ रहाउ ॥ मोहि निरगुण गुणु नाही कोई पहुचि न साकउ तुम्हरी घाल ॥ तुमरी गति मिति तुम ही जानहु जीउ पिंडु सभु तुमरो माल ॥१॥ अंतरजामी पुरख सुआमी अनबोलत ही जानहु हाल ॥ तनु मनु सीतलु होइ हमारो नानक प्रभ जीउ नदरि निहाल ॥२॥५॥१२१॥
पद्अर्थ: जिउ भावै = जैसे तुझे ठीक लगे, जैसे हो सके। मोहि = मुझे। प्रतिपाल = बचा ले। हम = हम (जीव)। बारिक = बच्चे।1। रहाउ।मोहि निरगुण = मैं गुण हीन में। साकउ = सकूँ। पहुचि न साकउ = मैं पहुँच नहीं सकता, मैं मूल्य नहीं आंक सकता, मैं कद्र नहीं जान सकता। घाल = मेहनत, वह मेहनत जो तू हमें पालने के लिए करता है। गति = आत्मिक हालत। मिति = माप। तुमरी गति मिति = तेरी आत्मिक अवस्था तेरा माप, तू कैसा है और कितना बड़ा है। जीउ = प्राण। पिंडु = शरीर। सभु = सारा। माल = सरमाया।1।
अंतरजामी = हे हरेक के दिल की जानने वाले! पुरख = हे सर्व व्यापक! अनबोलत = बिना बोले। सीतल = ठंडा ठार, शांत। प्रभ = हे प्रभू! निहाल = देख। नदरि = मेहर की निगाह से।2।
अर्थ: हे प्रभू! जैसे हो सके, वैसे (अवगुणों से) मेरी रक्षा कर। हे पारब्रहम! हे परमेश्वर! हे सतिगुरू! हम (जीव) तुम्हारे हैं, तुम हमारे पालनहार पिता हो।1। रहाउ।
हे प्रभू! मुझ गुण-हीन में कोई भी गुण नहीं है, मैं उस मेहनत की कद्र नहीं जान सकता (जो तू हम जीवों के लिए कर रहा है)। हे प्रभू! तू कैसा है और कितना बड़ा है- ये बात तू खुद ही जानता है। (हम जीवों का यह) शरीर और प्राण तेरे ही दिए हुए सरमाया हैं।1। हे हरेक के दिल की जानने वाले! हे सर्व व्यापक मालिक! बिना हमारे बोले ही तू हमारा हाल जानता है। हे नानक! (कह-) हे प्रभू जी! मेहर की निगाह से मेरी ओर देख, ताकि मेरा तन मेरा मन शीतल हो जाए।2।5।121। Ang 828




















