आज है MSME दिवस: भारत ने ब्रिक्स के माध्यम से वैश्विक एमएसएमई सहयोग किया मजबूत
चंडीगढ, 27 जून, 2026 (विश्ववार्ता) संयुक्त राष्ट्र ने आज सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) दिवस नियत किया है। यह आयोजन एमएसएमई के उन महत्वपूर्ण योगदानों के प्रति जागरूकता बढ़ाता है जो संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने में सहायक हैं। इस वर्ष एमएसएमई दिवस का विषय है “नवाचार और सतत औद्योगिक विकास के माध्यम से एमएसएमई का सशक्तिकरण।” है। industry and banking will be discussed today on msme day
संयुक्त राष्ट्र ने 27 जून को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) दिवस नियत किया है। यह आयोजन एमएसएमई के उन महत्वपूर्ण योगदानों के प्रति जागरूकता बढ़ाता है जो संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने में सहायक हैं।
आर्थिक विकास के प्रमुख प्रचालक के रूप में, एमएसएमई लचीली और समावेशी अर्थव्यवस्थाएँ बनाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, एमएसएमई दिवस 2026 का विषय है — “नवाचार और सतत औद्योगिक विकास के माध्यम से एमएसएमई का सशक्तिकरण।” MSME
भारत के हर कोने में उद्यम विभिन्न रूप लेते हैं। यह एक बुनकर हो सकता है जो पीढ़ियों पुरानी कारीगरी को बचा रहा है, एक छोटा निर्माता जो वैश्विक बाजारों को सेवा दे रहा है, एक महिला उद्यमी जो अपना व्यवसाय बना रही है, या एक युवा नवप्रवर्तनकारी जो स्टार्टअप खड़ा कर रहा है। आकार और क्षेत्र में विविध होते हुए भी, ये करोड़ों उद्यम भारत की एमएसएमई पारिस्थितिकी का आधार हैं।
आज एमएसएमई केवल व्यापार उद्यम नहीं रहे। वे रोजगार, नवाचार और समावेशी विकास के इंजन हैं, जो ग्रामीणऔर शहरी दोनों क्षेत्रों में अवसर पैदा कर रहे हैं। औपचारिकीकरण, डिजिटल परिवर्तन और सतत नीतिगत हस्तक्षेपों से संचालित, यह क्षेत्र लगातार विस्तारित हो रहा है। यह आत्मनिर्भर भारत और विकासित भारत 2047 के विज़न को सशक्त करते हुए अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है। उद्यम से सशक्तिकरण तक, एमएसएमई की कहानी तेजी से भारत की विकास यात्रा और रूपांतरण की कहानी बनती जा रही है।
जून 2026 में, भारत ने अपनी ब्रिक्स चैयरशिप के तहत प्रम ब्रिक्स एमएसएमई फोरम और तीसरी एसएमइ वर्किंग ग्रुप की बैठक आयोजित की। “एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण: वैश्विक मार्गों के लिए सतत जड़ें” विषय के तहत सदस्य देशों ने एमएसएमई विकास के लिए सर्वोत्तम प्रथाएँ और नीतिगत पहल साझा कीं। चर्चाएँ एमएसएमई के लिए वित्त तक पहुँच, प्रौद्योगिकी अपनाने और सतत विकास को बेहतर बनाने पर केन्द्रित रहीं।
भारत का एमएसएमई परिदृश्य: पैमाना, विविधता और प्रभाव
एमएसएमई आज भारत की आर्थिक वृद्धि और औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अर्थव्यवस्था में उनके विस्तारित रोल को दर्शाते हुए, सरकार ने 1 अप्रैल, 2025 से एमएसएमई की परिभाषा संशोधित की। निवेश और वार्षिक टर्नओवर पर आधारित नई परिभाषा उद्यमों को वृद्धि के लिए अधिक जगह देती है, जबकि इसके लिए नीतिगत समर्थन जारी रहता है।
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