
Life Style: देश में बच्चों और युवाओं के बीच डिजिटल लत लेती जा रही है गंभीर समस्या का रूप
लगातार स्क्रीन देखने से बढ रही है गंभीर समस्याएं
चंडीगढ, 6 फरवरी,(विश्ववार्ता) Youth in the country: देश में बच्चों और युवाओं के बीच डिजिटल लत तेजी से एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है और इसका सीधा असर उनकी मानसिक सेहत पर पड़ रहा है। यह बात गुरुवार को संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कही गई। वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश सर्वे में बताया गया है कि मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग की अत्यधिक आदत युवाओं में चिंता, अवसाद और सामाजिक अलगाव को बढ़ा रही है।
Life Style आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, डिजिटल लत पढ़ाई और कामकाज की उत्पादकता को नुकसान पहुंचा रही है। लगातार स्क्रीन देखने से नींद की कमी, ध्यान भटकना और एकाग्रता में गिरावट देखी जा रही है। इसके साथ ही युवाओं के सामाजिक संबंध भी कमजोर हो रहे हैं, जिससे उनका सामाजिक आत्मविश्वास प्रभावित हो रहा है।
सर्वे में विशेष रूप से 15 से 24 वर्ष की आयु के युवाओं में सोशल मीडिया की लत को गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। इसमें कहा गया है कि सोशल मीडिया की अत्यधिक निर्भरता एंग्जायटी, डिप्रेशन, कम आत्मसम्मान और साइबर बुलिंग जैसी समस्याओं से गहराई से जुड़ी हुई है। इसके अलावा लगातार स्क्रॉल करने की आदत, दूसरों से तुलना और ऑनलाइन गेमिंग डिसऑर्डर युवाओं में नींद की परेशानी, चिड़चिड़ापन, आक्रामक व्यवहार और सामाजिक दूरी को बढ़ा रहे हैं।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार द्वारा कई कदम उठाए गए हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूलों और स्कूल बसों में सुरक्षित इंटरनेट उपयोग को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। शिक्षा मंत्रालय की ‘प्रज्ञ्यता’ रूपरेखा डिजिटल शिक्षा की योजना बनाते समय स्क्रीन टाइम पर ध्यान देने की सलाह देती है। वहीं, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम सीमा और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े दिशा-निर्देश तय किए हैं।
सर्वे में यह भी बताया गया कि अक्टूबर 2022 में शुरू की गई टेली-मानस (Tele-MANAS) मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन को अब तक 32 लाख से अधिक कॉल प्राप्त हो चुकी हैं। इसके अलावा बेंगलुरु स्थित निमहांस में शुरू की गई SHUT क्लिनिक तकनीक के अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग से जूझ रहे किशोरों और युवाओं को विशेष उपचार प्रदान कर रही है। हाल ही में लागू ऑनलाइन गेमिंग (नियमन) अधिनियम, 2025 को भी युवाओं में डिजिटल लत और आर्थिक नुकसान को रोकने की दिशा में एक अहम कदम बताया गया है।
आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि डिजिटल पहुंच को पूरी तरह सीमित करना संभव नहीं है, इसलिए इसके संतुलित उपयोग पर जोर देना जरूरी है। इसके लिए शहरी झुग्गी क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में ऑफलाइन यूथ हब बनाने, स्कूलों द्वारा सुरक्षित और नियंत्रित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने और डिजिटल वेलनेस पाठ्यक्रम शुरू करने की सिफारिश की गई है। Life Style
सर्वे ने निष्कर्ष में कहा कि बच्चों और युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर समान ध्यान देने वाला समग्र दृष्टिकोण अपनाना बेहद जरूरी है।
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