एक युग का अंत! एशिया की सबसे बूढी हथिनी वत्सला की मौत
पन्ना टाइगर रिजर्व में ली आखिरी सांस
गिनीज रिकॉर्ड में नहीं हो सकी दर्ज
चंडीगढ, 9 जुलाई (विश्ववार्ता) मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व से एक दुखद खबर आई है, जिसने पूरे वन्यजीव प्रेमियों को मायूस कर दिया है। पन्ना टाइगर रिजर्व की शान और एशिया की सबसे उम्रदराज मानी जाने वाली हथिनी वत्सला का मंगलवार दोपहर करीब 1:30 बजे निधन हो गया है। 100 साल से भी ज्यादा की उम्र जी चुकीं वत्सला लंबे समय से बीमार चल रही थीं।
हालांकि, उम्र के सटीक दस्तावेज न होने के कारण वत्सला का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाया, लेकिन फिर भी उन्हें विश्व की सबसे उम्रदराज हथिनी के तौर पर याद किया जाएगा। वत्सला केवल एक हथिनी नहीं थी, बल्कि वह संवेदनशीलता, सेवा और देखभाल का प्रतीक थी। उसके निधन से पन्ना टाइगर रिजर्व ही नहीं, बल्कि पूरा वन्यजीव समुदाय एक विरासत से वंचित हो गया है। उसका जीवन और सेवा हमेशा याद रखी जाएगी।
वत्सला का जन्म केरल के नीलांबुर जंगल में हुआ था और उन्होंने अपना शुरुआती जीवन वनोपज के परिवहन में बिताया था। 1971 में करीब 50 साल की उम्र में उन्हें होशंगाबाद के बोरी अभयारण्य लाया गया, और फिर 1993 में वत्सला को पन्ना टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित कर दिया गया। पन्ना आकर वत्सला ने सिर्फ हाथियों के झुंड का नेतृत्व ही नहीं किया, बल्कि वे बाघों की ट्रैकिंग में भी 10 सालों तक मदद करती रहीं। 2003 में उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी वे हिनौता कैंप में रहकर छोटे हाथी के बच्चों की देखभाल करती थीं और उन्हें गुर सिखाती थीं। इसी मातृ प्रवृत्ति और स्नेह भरे स्वभाव के कारण उन्हें ‘दादी’ के नाम से भी पुकारा जाता था।
‘दादी मां’ के नाम से थी मशहूर
आपको बता दें कि पीटीआर में वत्सला को ‘दादी’ कहकर पुकारा जाता था, क्योंकि वह अन्य हथिनियों के बच्चों की देखभाल भी एक दादी की तरह करती थी। जब भी किसी हथिनी के बच्चे का जन्म होता, तो वत्सला कुशल दाई की तरह उसकी देखरेख में मदद करती थी। वह हाथियों के पूरे कुनबे में एक ममता भरी उपस्थिति मानी जाती थी।
गिनीज रिकॉर्ड में नहीं हो सकी दर्ज
हालांकि वत्सला की उम्र 100 वर्ष से अधिक मानी जाती रही है, लेकिन वह गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज नहीं करा सकी। इसका कारण यह था कि पीटीआर कार्यालय के पास वत्सला के जन्म से जुड़ा कोई आधिकारिक दस्तावेज मौजूद नहीं था। प्रबंधन ने उसके दांतों के सैंपल लैब जांच के लिए भेजे थे ताकि उम्र का सटीक अनुमान लगाया जा सके, लेकिन वहां से भी कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिल सका।























