प्रशासनिक तंत्र और Adminocracy -सुमिता धीमान
जैसे लोकतंत्र, राजतन्त्र, सैन्यतंत्र होता है l ऐसे ही मैने प्रशासनिक तंत्र का प्रावधान सोचा है l राजतन्त्र और सैन्य तंत्र से दुःखी हो कर लोगो ने लोकतंत्र की खोज की थी l पर सोचने वाली बात यह है कि क्या सच मे लोकतंत्र राजतन्त्र से एक अति उत्तम विकल्प है ? लोकतंत्र अपनी देश की जनता के साथ न्याय कर पाता है ? लोकतंत्र हर क्षेत्र मे निष्पक्ष कार्य कर पाता है ? लोकतंत्र क्या सच मे देश को शांत, विकास करने वाला माहौल उपलब्ध करवा पाता है ? लोकतंत्र क्या सच मे गरीब लोगो और पिछड़े वर्ग के लोगो की सुनता है ? लोकतंत्र देश मे सहिष्णुता और सौहार्द रखने मे कामयाब रहता है ? क्या लोकतंत्र देश के औद्योगिक विकास की गति बढ़ाने मे सहायक होता है ? लोकतंत्र लोगो की सोई हुई मानसिकता को जगा कर उसे तार्किक और युक्तिसंगत करने मे सहायक होता है ? क्या लोक तंत्र लोगो को एक नई सोच, आयाम दे कर उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण देने मे सफल होता है ? क्या लोकतंत्र ने देश से भ्रष्टाचार को निर्मूल कर दिया ? क्या लोकतंत्र मे मीडिया सवतंत्र और निष्पक्ष है ? क्या सभी राजनैतिक दल ईमानदार, निष्पक्ष, पढ़े लिखे, सुलझे, उच्च चरित्र वाले, उच्च विचारो वाले, मानवता से भरपूर, समाज सुधार और समाज भलाई वाले, देश प्रेम से लबा लब और परमार्थ वाले नेताओ का गढ़ होते है ? जिस मंत्री ने जो पढ़ाई कर रखी होती है l क्या उसे वही मंत्रालय दिया जाता है ? क्या नेताओ को उनकी गुणवत्ता और कसौटी पर परख कर चुना जाता है ? क्या देश मे नेताओ को चुनने के लिए कोई प्रवेश परीक्षा, कोई पाठ्यक्रम, कोई डिग्री, कोई प्रशिक्षण और उनका कोई मेडिकल करवाया जाता है ? कितनी शर्म की बात है कि भारत जैसे क्षेत्रफल और जनसंख्या के हिसाब से इतने बड़े देश के लोकतंत्र मे राजनीति मे आने के लिए कोई भी मानदंड नही !!!! कोई भी कम पढ़ा लिखा, बिना किसी अनुभव के, जिसके पीछे चार उसी के जैसे लोग खड़े है l वो राजनीती मे आ कर लोकतंत्र को हांकने लगता है !!?!!
वैसे भी भारत मे लोकतंत्र लोकतंत्र बचा ही कहाँ है ? ! भारतीयो की चाटुकारिता, तुच्छ लालच, क्षणिक सुख सुविधाओ का मोह, भोग विलास की इच्छा, नाजायज खाने की लालसा, हराम का सात पीढ़ियो तक इकट्ठा करने की चाहत, उच्च सामाजिक-आर्थिक स्तर की तमन्ना, थोथा चना बजे घना वाली आत्म श्लाघा, गला काट प्रतिस्पर्धा, दिखावेबाजी, दम्भ-अंह, अज्ञानता, तर्कहीनता और मैं मैं ने लोकतंत्र का कुछ और ही हाल बेहाल कर दिया है ! इन सब वजहो ने भारत मे ‘लोकतंत्र’ को ‘गृहतन्त्र’ बना कर रख दिया है l
राजतन्त्र की ही तरह भारतीय लोकतंत्र मे भी चंद परिवारो के हाथ मे देश की राजनीति की डोर है l ठीक जैसे राजतन्त्र मे राज परिवार के ही लोग राज करते है l बिल्कुल ठीक ऐसे ही भारतीय लोकतंत्र मे चंद राजनैतिक परिवार के सदस्य ही लोकतंत्र को हाँक रहे है l आज भी भारत राजनैतिक आधार पर छोटी छोटी रियासतो मे बंटा हुआ है l हर राज्य मे दो चार राजनैतिक परिवार ऐसे होते है जो लोकतंत्र पर कुण्डलिनी मार कर बैठे होते है l ये दो चार परिवार आपसी सहमति और सामजस्य से राज्य और देश को मिल जुल कर बारी बारी से खाते है l
और पढ़ा लिखा सजग – चेतन, समझदार, मेहनती, देश प्रेम से लबरेज भारतीय मतदाता हाथ मे लॉलीपोप ले कर कि हम लोकतंत्र चला रहे है, हम लोकतंत्र चला रहे है सोच कर फूला नही समाता !!!? ये सब अदृश्य बंधुआ मजदूरी और अदृश्य तानाशाही के सिवा ओर कुछ नही है l लोकतंत्र मे भोले भले मतदाता कठ्ठपुतली की तरह और जबरदस्त सम्मोहन मे होते है l लोकतंत्र मे मतदाता घंटो लाइन मे खड़ा हो अपने हाथो से अपने लिए एक लोकतांत्रिक तानाशाह चुनते है l और बाद मे अपने छोटे छोटे कामो को करवाने के लिए इनके पीछे पीछे घूमते है l और वो नेता अकड़ कर पाँच साल इसी भोली भली जनता के पैसो के दम पर एक ठाठ वाली राजसी जिंदगी जीता है l और नासमझ जनता कोल्हू के बैल की तरह दिन रात टैक्स और इनके खर्चे, नखरे उठाने लिए काम करती है l लोकतंत्र नेताओ की सेवा करने का सेवा तंत्र बन कर ही रह जाता है l
लोगो द्वारा चुना गया लोकतान्त्रिक नेता पाँच साल के लिए सत्ता मे आता है l इन मिले पाँच सालो मे उसने अपनी कुर्सी भी विपक्ष से संभालनी होती है l अपने बैंक खाते, तिजोरियाँ भी भरनी होती है l अपने परिवार और रिश्तेदारो को भी तारना होता है l अपने जान पहचान के सज्जनो, मित्रो, चम्मचो, ताबेदारो का भी कुछ सोचना होता है l अपनी जन्मो जन्मो की अतृप्त इच्छाएँ और लालसाएँ भी पूरी करनी होती है l इस सब मे देश का और जनता का भी भला करना है l ये सब इस भोली भाली, सीधी साधी जनता द्वारा चुने गए लोकतान्त्रिक तानाशाह बेचारे भूल ही जाते है l इन पाँच सालो मे अगर कोई एक – दो अच्छे काम इन लोकतान्त्रिक नेताओ से हो भी जाएँ तो वो देश हित या जनकल्याण की मनोकामना से नही बल्कि आने वाले चुनावो मे फिर से ‘’लोकतान्त्रिक तानाशाही ‘’ हासिल करने के लिए एक हथकंडा भर से ज्यादा नही होता l जो लोकतंत्र और चुनावो मे वोट बैंक और कुत्ते रुपी जनता के आगे हड्डी फेंकने से ज्यादा नही होता l जैसे कुत्ता अपने मालिक की सब तरह की प्रताड़ना सह कर भी अपने मालिक से वफादारी नही छोड़ता l ठीक ऐसे ही भारतीय लोकतान्त्रिक मतदाता अपने नेताओ के सब कच्चे चिट्ठे पता होने के बाद भी उनको दोबारा सत्ता मे लाना नही भूलते !!?!! l और मेरे तो सुनने मे यह भी आया है कि मात्र चुनाव जीतने के लिए साम, दाम, दंड, भेद का इस्तेमाल कर कर इन सब की धज्जियाँ ही ना उड़ा देते बल्कि कुछ नेता तो मात्र चुनाव जीतने के लिए किसी की जीवन लीला भी समाप्त करने से नही चूकते ! अपनी सत्ता के दम्भ मे कानून को अपनी रखैल बना कर रखते है l
अगर सच मे ही ये लोकतान्त्रिक नेता देश का भला चाहते तो मेहनती, कर्मठी, शिक्षित, संयमी, उच्च जीवन यापन करने वाले भारतीयो का भारत ना जाने कहाँ से कहाँ पहुँच जाता !!!
वास्तविक लोकतंत्र एक ऐसा ख्वाब जो मौजूदा इंसानी मनोदशा और स्वभाव, लोकतांत्रिक परिपाटी, सख्त कानून एवं व्यवस्था के बिना कभी भी हासिल ही नही किया जा सकता l भ्रष्ट नेता और दूषित राजनीति के कारण काम, क्रोध, मोह, लोभ, अंह, ईर्ष्या, छल, द्वेष, हठ, घात, दम्भ आदि की पनीरी खूब फलती फूलती है l जिस कारण सिस्टम मे फंसा आम इंसान बेबस, लाचार नागरिक बहती धारा मे तैरने के को मजबूर हो जाता है l वर्ना आज भी हमारे भारत मे श्री लाल बहादुर शास्त्री जी, जनरल सजग सिंह जी, भगत सिंह जी और अब्दुल कलाम जी जैसो की कोई कमी नही है l यहाँ तो चेतक जैसे घोड़े इतने वफादार है तो इंसान कितने वफादार होंगे l भारतीयो को सही वातावरण नही मिला l सदैव त्रासदी यही रही कि भारत मे राजनैतिक माहौल कभी भी भ्रष्टाचार रहित निष्पक्षता वाला, सत्यनिष्ठ और नैतिकता से भरपूर नही रहा l अपने तुच्छ लालच की वजह से हम भ्रष्टाचार को अपना माई बाप बना देश को कितना खोखला कर देते है l जिस कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की साख, मजबूत, सुदृढ़ता, विश्वास्पात्रता, सुरक्षा, करेंसी आदि सब नीचे गिरना शुरू हो जाता है l
एक भ्रष्ट नेता एक भ्रष्ट सिस्टम की ही सृजना कर सकता है l क्योंकि जिन के घर काँच के होते है l वो दूसरो के घर पर पत्थर नही मारते l और इस तरह एक भ्रष्ट नेता जो कि सिर्फ पाँच साल के लिए ही चुना गया होता है विपक्ष के दवाब मे गुग्गी की तरह आँख बंद कर शासन करने के सिवा उसके पास कोई और चारा नही होता l आखिर नंगा नहाएगा क्या और निचोड़ेगा क्या ? ऐसे लालची, स्वार्थी, कपटी, बेईमान नेता के कारण देश मे पनपे और पसरे भ्रष्टाचारिक वातावरण मे लाल बहादुर शास्त्री जी जैसे इंसानो का ठहरना भारी हो जाता है l क्योंकि चंद लालची गीदड़ मिल कर शेर का जीना भारी कर देते है l और बेचारी जनता और मीडिया रोटी, कपड़े और मकान की सोच से बाहर ही नही खुद को निकाल पाती l श्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने मात्र अठारह महीनो के ही अपने शासन काल मे भारत के दुश्मनो और अहितेच्छुओ के नाक मे दम कर दिया था l
कितनी हैरानी की बात है कि सरकार अगर किसी को भी कोई सरकारी नौकरी देती है तो उसके लिए भी न्यूनतम शिक्षा की सीमा होती है l उसका नौकरी ज्वाइन करने से पहले प्रॉपर मेडिकल टेस्ट करवाया जाता है कि यह इंसान इस नौकरी के योग्य है भी या नही l जैसे किसी मानसिक अपाहिज ने ही इतनी पढ़ाई कर ली हो l मात्र उसका पढ़े लिखे होना उसके उचित मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का प्रतीक नही होता l मात्र एक चपड़ासी की नौकरी पाने के लिए भी सरकार ने कितने मानदंड रखे हुए है !
पर राजनीती ही ऐसा ”जंगल राज का अखाडा” है यहाँ प्रवेश के लिए कोई मानदंड नही !!! कोई भी ऐरा गेरा मुँह उठा कर राजनीति मे चला आता है l ज्यादातर कम पढ़े लिखे, आवारा, लोफर पार्टीकर्ता के नाम पर राजनीति से जुड़ जाते है l अब ऐसे कार्यकर्ता देश का किस तरह का विकास और कल्याण करेंगे ? वो तो सब इतने दशको से देख ही रहे है l बिना किसी पढ़ाई की लिमिट के, बिना किसी प्रशिक्षण और मेहनत किए, बिना कोई मेडिकल करवाए कोई भी हठी, दम्भ, अंहकारी राजनीति मे अनाड़ियो की भांति अपने दाव पेच आजमाने आ जाता है l इस तरह लोकतंत्र का और भोली भाली जनता के विशवास का फटीचर हाल कर देता है l
एक अध्यापक, लेक्चरर और प्रोफेसर की नौकरी के लिए ही कितने क्राइटेरिया है l व्यक्ति का उच्च शिक्षित होना बहुत जरुरी है l मात्र पढ़ाने का ही तो काम है l अक्षर ज्ञान होना काफी है l इंसान का आठवीं दसवीं होना प्रायप्त है l आखिर बच्चो को वो ही तो पढ़ाना है जो पुस्तक मे लिखा होता है l पुस्तक मे से पढ़ कर बच्चो को वो ही बोल कर बता दो l पढ़ाने मे सिर्फ इतना ही तो काम होता है l पर नही मास्टर, लेक्चरर और प्रोफेसर की नौकरी पाने के लिए इंसान का स्नातक, स्नातकोत्तर होना तो जरुरी ही है पर पढ़ाई की कोई प्रोफेशनल डिग्री या नेट क्लियर होना भी बहुत जरुरी है l मात्र स्नातक और स्नातकोत्तर होना भी सरकार के लिए प्रायप्त नही l इन डिग्रियो के साथ साथ यह भी देखा जाता है कि ये डिग्रीयाँ कौन से दर्जे मे पास की ? फिर शिक्षण क्षेत्र मे कितना अनुभव है ? यह भी देखा जाता है !!!
पर अगर राजनीति मे किसी को कोई चार लोग जानते है तो झट उसे MC, MLA, और MP बना दिया जाता है !!! चाहे बेचारे को राजनीति का ”र” तक भी लिखना ना आता हो ! उसे किसी भी तरह की शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुभव, मेडिकल टेस्ट और चरित्र प्रमाण पत्र की जरुरत नही होती l जैसे देश देश ना हो कर कोई गेंद हो गई l उसे किसी भी कम पढ़े लिखे, दावेदारी के लिए अयोग्य, बिना प्रशिक्षण, अनुभव के इधर उधर किसी मानसिक अपाहिज बच्चे को खुश करने के लिए किक मारने के लिए दे दो l मेरे मामले मे इन सरकारो और नेताओ ने ठीक ऐसा ही तो किरदार निभाया है !!!???!!! बेचारी भेड़ बकरी जनता बहुत ज्यादा परेशानी होने पर दो चार दिन हरकत करेगी l पर रोटी, कपड़ा और मकान के चक्कर मे और राजनेताओ की ”लोकतान्त्रिक दादागिरी” और कानूनी झंझटो से बचने के लिए फिर अपनी घर गृहस्थी के कोल्हू को चलाने के लिए बिना किसी तर्क शक्ति और बोध का बैल बन जाती है ! विरासत मे बिना मेहनत के मिली नेतागिरी, चेले चिमटो की फौज, बेवजह की चटुकारिता, आत्मश्लाघा इंसान को निरकुंश लोकतान्त्रिक तानाशाह बना देती है l
चुनाव लड़ने की ही तरह युद्ध लड़ना भी एक महत्वपूर्ण काम है l पर अगर नेता समझदार, सूझबूझ वाला, पढ़ा लिखा, चेतन, वाक्पटुता मे निपुण, दलेर, दृढ़ निश्चयी हो तो ज्यादातर युद्ध की नौबत ही नही आती l आजकल ज्यादातर राजनैतिक असफलता, अदूरदर्शिता और लालच ही युद्ध की वजहे होती है l अब सेना मे एक फौजी की ही भर्ती हो तो उसको कई तरह के टेस्ट से गुजरना पड़ता है l एक आदर्श फौजी के लिए जो criteria रखा होता है l उस क्राइटेरिया के तमाम स्टेप क्लियर करने पड़ते है l अगर कोई लड़का किसी एक स्टेप को भी पार नही कर पाया तो उसे अयोग्य सिद्ध करके प्रतियोगिता से बाहर कर दिया जाता है l मान लो उसने पाँच मे से चार स्टेप भी पार कर लिए पर पाँचवे मे रह गया तो वो फिर फौजी नही बन सकता l फौजी बनने के लिए आयु सीमा, न्यूनतम पढ़ाई की सीमा, मेन्टल एबिलिटी और रिटेन टेस्ट, फिजिकल टेस्ट जैसे प्रतिभागी की लम्बाई, चौड़ाई, देखने की क्षमता, सुनने की क्षमता, दौड़ना, छलांग लगाना आदि आदि फिर इंटरव्यू के इतने सख्त मानदंडो से गुजरने के बाद भी लड़का फौजी नही बनता ! यह तो सिर्फ दस हजार मे से दस लड़के चुनने का एक कार्यक्रम भर ही था l अभी भी चुने गए लड़को की ट्रेनिंग तो बाकी रह जाती है l फिर इतनी मेहनत के बाद चुने गए लड़के को बाकायदा प्रशिक्षण दे कर ही भारत माता का एक बहादुर फौजी घोषित किया जाता है !!!
आखिर चुने गए लड़के की फौजी और युद्ध की ट्रेनिंग क्यों ? वो पहले से ही शारीरिक और मानसिक स्तर पर फिट है l और लड़को को लड़ना सीखने की जरुरत है क्या ? हम सब को पता है कि आम जिंदगी मे लड़ाई झगङे करना और युद्ध भूमि मे जा कर दुश्मनो के दाँत खट्टे करने मे बहुत अंतर है l ठीक इसी तरह अगर कोई समझदार है, बुद्धिमान है तो इसका यह हरगिज भी मतलब नही कि वह इंसान राजनीति मे आने के काबिल है l वह देश के लिए हर छोटे बड़े फैंसले लेने के योग्य इंसान है अगर कोई दसवीं पढ़ा है और वो अपने समय मे बहुत मेधावी छात्र भी रहा हो l और बहुत ज्यादा समझदार और बुद्धिमान इंसान भी हो l तो क्या इसका मतलब यह है कि वो M.Sc. को zoology पढ़ाने के योग्य है ? माना वह M.Sc. की किताबे पढ़ लेगा l पर उन किताबो मे छुपे रहस्यो, उन किताबो मे लिखी बातो का सार, उन किताबो मे लिखी बातो की आत्मा को ना जान पाएगा l Zoology का प्रोफेसर बनने के लिए zoology का मास्टर होना बहुत ही जरुरी है l
माना इंसान धरती पर सब से ज्यादा विकसित और दूसरे प्राणियो के मुकाबले ज्यादा बुद्धिमान प्राणी है l पर इंसान के साथ यह दिक्कत है कि जन्मजात इंसान किसी भी नैसर्गिक गुण, क्षमता, कौशल, दक्षता के साथ पैदा नही होता l जैसे मछली, साँप, मधुमक्खियाँ, भेड़िया, कुत्ता, बिल्ली आदि के बच्चे होते है l इंसान को किसी भी क्षेत्र मे अपनी किस्मत आजमाने के लिए उस क्षेत्र की पढ़ाई, प्रशिक्षण लेना ही पड़ता है l दूसरा ह्यूमन साइकोलॉजी बहुत ही ज्यादा अस्थिर है l इंसान पर काम, क्रोध, मोह, लोभ, अंह, ईर्ष्या, द्वेष, छल, हठ, कपट, आलस्य, जमीन जायदाद, पैसा, सुंदरता आदि आदि के आक्रमण होते ही रहते है l जिस कारण इंसान बहुत ज्यादा unpredictable , unbelievable हो जाता है l इंसान को अपना मन साधना पड़ता है l उस पर नियंत्रण करना पड़ता है l बहुत प्रयास और तप से अपने मन को एकाग्रचित कर सद्मार्ग पर चलाना पड़ता है l आजकल कलयुग के सन्दर्भ मे ”शिक्षा तप” अपने मन को साधने के लिए, विकारो के विनाश के लिए सब से उत्तम तप है l
कितनी हैरानी की बात है कि हर क्षेत्र के लिए हमने खास विषय बना रखे है l उन विषयो पर आगे BA, MA, B.com, M.com, MBA, B.Sc., M.Sc., MCA , B.ed, M.ed, MBBS, MD, MS, Nursing, pharmacy, BE, ME, B.tech, M.,tech Law, Ph.D, NDA, NSD, Dada saheb phalke film institute, cooking classes, stitching classes, parlour course, nail art etc etc का भी प्रावधान रखा गया है l पर देश संचालन के लिए कोई विषय, पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण नही !!!?!!! वो भी अभी तक ! अगर देश सुव्यवस्थित ढंग से चलेगा, अगर देश सही, अनुभवी, सुशिक्षित हाथो मे होगा l तभी देश मे लागू की गई जन कल्याण की योजनाएँ, विकास के कार्य, सामजस्य, देश का बोध, परिश्रम फलित और सही दिशा मे अग्रसर होगा l वर्ना कम पढ़े लिखे, अनुभवहीन, डॉक्टरी, इंजीनियरिंग, हिंदी, कॉमर्स, IT पर मास्टरी कर राजनीति मे आए लोग वो ही देश का हाल करेंगे जैसा आज देश और दुनिया का हाल है l
हर एक क्षेत्र के लिए विषय और उस विषय को पढ़ाने के लिए पाठ्यक्रम है l तो देश को चलाने के क्षेत्र के लिए कोई विषय और पाठ्यक्रम क्यों नही ? मुझे बेहद आश्चर्य है कि भारत जैसे वैदिक सभ्यता वाले देश मे विभिन्न तरह के हर विषयो पर वेदो, ग्रंथो, पुस्तको के रचायता भारतवर्ष मे ”The Nation Management & Administration” या ”देश प्रबंधन और संचालन” जैसे किसी विषय का अस्तित्व ही नही ?!!! हद है !!! देश के नौनिहालो, कर्णधारो देश के भविष्य, देश के निर्माता, देश के दिशा निर्देशो को इस मुतअल्लिक कोई भी शिक्षा और प्रशिक्षण नही दिया जाता ?! देश ना हो गया कंपनी बाग हो गया l कोई भी चला आता है राजनीति मे मुँह उठा कर l तभी तो भारतीय राजनीति ”जंगल राज का अखाडा” बनी हुई l जो देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए नही किन्तु देश के पतन के लिए दिन रात कार्यरत है l ये सब मैं अपने दशको लम्बे अनुभव और गहन अध्ययन के बाद लिख रही हूँ l
इस से पहले कि मैं कुछ और आगे लिखूँ l मैं यहाँ अपने अति आदरणीय और पूज्यणीय दसवीं कक्षा के मेरे गणित के अध्यापिका श्रीमति निर्मल गुप्ता जी के साथ घटित हुए एक वाक्य का वर्णन करना चाहूँगी दसवीं की परीक्षा देने के बाद मेरी जिंदगी मे एक ही प्रश्न की जैसे बाढ़ सी आ गई l जो भी मिलता, जब उसे पता चलता कि मैने दसवीं की परीक्षा दी है l तो उसका मुझसे यही सवाल होता कि आगे +1 मे क्या रखना है ? मेरा तो पहले से ही तय था कि मैं मेडिकल सब्जेक्ट ही +1 मे रखूँगी l सब को ही मेरे बारे मे पता था कि मैं बहुत सख्त बीमार रहती हूँ l तो बिना किसी अपवाद के सब ने ही यही कहना कि माना तुम बहुत होशियार हो l पर तुम बहुत बीमार रहती हो l और साइंस बहुत मुश्किल विषय होता है l तुम कोई भी आर्ट्स के साधारण से विषय रख कर मात्र BA कर लो l क्योंकि आजकल इंसान का BA होना बहुत जरुरी है l सब ने, सब ने ही मुझे साइंस ना रखने का सुझाव दिया l और कहा कि कोई भी आसान से आर्ट्स के विषय रख मुझे जैसे तैसे BA कर लेनी चाहिए l जिससे कि मैं पढ़े लिखो की श्रेणी मे आ जाऊँगी l
फिर +1 मे दाखिला लेने के लिए मैं दसवीं का DMC लेने स्कूल गई तो मैने सोचा कि मुझे तो हर किसी ने, हर किसी ने ही साइंस ना रखने की सलाह दी है l मैं अपने निर्मल गुप्ता मैडम जी से पूछती हूँ कि मुझे +1 मे कौन से विषय रखने चाहिए ? तो इस पर मेरे निर्मल गुप्ता मैडम जी ने मुझे कहा कि सुमिता मुझे तुम पर पूर्ण विश्वास है कि तुम मेडिकल पढ़ लोगी l पर तुम बहुत बीमार रहती हो l तो तुम्हें साधारण से कोई आर्ट्स के विषय ही रखने चाहिए l तांकि खराब सेहत के कारण तुम्हें कोई परेशानी ना हो l मैडम जी की बात सुन शायद मेरा चेहरा उतर सा गया होगा l मेरे अनुभवी मैडम जी ने मेरे भावो को समझ कर मुझे आगे समझाया कि मेडिकल सब्जेक्ट मे बहुत कड़ी मेहनत करनी पड़ती है l मेडिकल सब्जेक्ट मे डबल शिफ्ट होती है मॉर्निंग और इवनिंग l एक शिफ्ट मे थ्योरी की क्लास होती है और दूसरी शिफ्ट मे प्रैक्टिकल होता है l तुम इतनी खराब सेहत के साथ दो दो शिफ्ट का बोझ नही उठा पाओगी l और फिर तुहें तीन तीन प्रैक्टिकल करने और प्रैक्टिकल फाइल भी तैयार करनी पड़ेगी l और फिर 2 – 3 घंटे तुम्हें प्रैक्टिकल मे खड़े भी रहना पड़ेगा l फिर कोई पीरियड ग्राउंड फ्लोर पर तो कोई पीरियड फर्स्ट फ्लोर पर l प्रैक्टिकल के लिए भी इधर उधर जाओ l वही आर्ट्स वालो के मात्र पाँच ही पीरियड लगते है और वो बारह बजे फ्री भी हो जाते है l और वही मेडिकल वाले चार पाँच बजे फ्री होते है कॉलेज से l
और इतनी मेहनत से की गई B.Sc का आगे जा कर कोई अलग से विशेष फायदा भी नही होता l आगे BA or B.Sc को एक सामान ही लिया जाता है l किसी भी नौकरी मे BA or B.Sc का सेम ही तनख्वाह, पे स्केल होता है l यह भी नही कि अगर किसी ने इतनी मेहनत से B.Sc की है तो BSc वालो को नौकरी प्राप्त करने के लिए BA वाले के मुकाबले मे कोई भी विशेष प्राथमिकता या सुविधाएँ दी जाती है l
फिर मुझे मैडम जी ने आगे समझाया कि अगर तूँने साइंस सब्जेक्ट ही पढ़ने है तो Non medical रख ले l क्योंकि इस मे इतनी सिरदर्दी नही होती l और इस मे सिर्फ दो ही प्रैक्टिकल होते है l जिस कारण तुम्हें सिर्फ दो ही प्रैक्टिकल फाइल बनानी पड़ेगी l और ऐसे तुम्हें हफ्ते मे सिर्फ चार ही प्रैक्टिकल लगाने पड़ेंगे l और इस तरह मुझे प्रैक्टिकल से हफ्ते मे दो दिन की छुट्टी मिल जाएगी l जिस से दो दिन तेरी रेस्ट भी हो जाएगी l और वही मेडिकल वालो के हफ्ते के छः दिन ही प्रैक्टिकल लगते है और इस तरह उन्हें हफ्ते मे प्रैक्टिकल मे कोई छुट्टी या रेस्ट नही मिलती l इतना सब समझाने के बाढ़ मैडम जी ने फिर मुझे कहा कि मैं आर्ट्स ही रखूँ l क्योंकि साइंस की डबल शिफ्ट की भागदौड़, प्रैक्टिकल, प्रैक्टिकल फाइल बनाने की मेहनत मैं इतनी खराब सेहत मे नही कर पाऊँगी l मैडम जी को मेरी सेहत के बारे मे पता था और वो मेरे लिए चिंतित थे l मेरे दसवीं के साइंस के आदरणीय और पूज्यणीय गीता बब्बर मैडम जी ने तो मुझे दसवीं शुरू होते ही पूरा एक पीरियड समझाया था कि आगे +1 मे मेडिकल मत रखना l क्योंकि तुम बहुत बीमार रहती हो l
पर मेरे प्रारब्ध ने मेरे लिए कोई और ही रास्ता, कोई और ही आयाम तय कर रखा था l सो मेरी डेस्टिनी मेरी अंगुली पकड़े मेरे लिए पहले से ही चुने गए रास्ते पर मुझे लिए जा रही थी l मैने +1 मे साइंस ही रखी और साइंस मे भी मेडिकल ही रखा l दरअसल मेडिकल, नॉन मेडिकल, आर्ट्स, कॉमर्स विषय देखने के बाद मुझे मेडिकल विषय ही सब से ज्यादा आसान लगा है !!! मैने तब अपनी तरफ से सब से आसान विषय ही रखे थे haaaa!!!
अगर मुझे लगा कि मुझे मेडिकल विषय ही पढ़ना चाहिए तो मुझे आर्ट्स की सिंगल शिफ्ट की जगह साइंस मे डबल शिफ्ट करनी पड़नी थी l ऊपर से सारा पाठ्यक्रम अंग्रेजी भाषा मे l यानि मुझे बहुत बहुत कठिन परिश्रम करना पड़ना था l यानि आर्ट्स के मुकाबले मुझे साइंस मे ज्यादा समय, ज्यादा ऊर्जा और ज्यादा मेहनत करनी पड़नी थी l
अगर मुझे लगा कि मुझे मेडिकल ही पड़ना चाहिए तो मुझे इसके लिए डबल शिफ्ट लगानी पड़ी !!!! अगर किसी को यह लगे कि वो देश चला सकता है l Country management & administration को संभाल सकता है तो उस व्यक्ति को कितनी शिफ्ट मे और कितना हार्ड वर्क करना चाहिए ? देश चलाना यानि हर क्षेत्र के साथ न्याय करना यानि हर क्षेत्र के बारे मे हर छोटी बड़ी बात पता हो l हर क्षेत्र के जनता पर +ve or -ve प्रभावो की जानकारी, उन सब मामलो को संभालने की क्षमता और दूरदर्शिता l
मैं साइंस/मेडिकल मे पास होती, फैल होती, फर्स्ट डिवीजन मे पास होती, सेकंड डिवीज़न मे पास होती या थर्ड डिवीज़न मे पास होती l मैं मेडिकल पढ़ती ना पढ़ती l इन सब बातो का मेरी जिंदगी के सिवा किसी पर कोई खास फर्क नही पड़ता l पर देश को चलाने वाला तनिक भी गल्त फैसला ले ले तो उसका आम जनता और देश पर कितना बुरा असर पड़ेगा ? लाखो, करोड़ो लोग इस से प्रभावित होंगे l इस तनिक से गल्त फैसले के कारण देश को कितना नुक्सान उठाना पड़ेगा ? इस तनिक से गल्त फैसले के कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि कितनी खराब होगी l पहला और दूसरा विश्व युद्ध राजनेताओ और देश के कर्ता धर्ता बनी बैठे चंद लोगो के गल्त फैसलो के ही परिणाम थे !
बेशक कोई कितना भी समझदार क्यों ना हो l पर शिक्षा और प्रशिक्षण इंसान की सोच को बहुत प्रभावित करते है l हीरा भी अच्छे से तराशने के बाद ही अपने असली, कीमती, प्रशंसनीय स्थिति मे आता है l यहाँ तक कि धरती पर आ कर श्री राम चंद्र जी और श्री कृष्ण जी तक को शिक्षा ग्रहण करनी पड़ी और युद्ध का प्रशिक्षण लेना पड़ा था l तो आम, साधारण इंसान की हम क्या ही बात करे ? दशरथ जी को राम जी और दूसरे बेटे कितनी मुश्किल से प्राप्त हुए थे l वो राजा थे l वो चाहते तो अपने महल मे ही सब सुख सुविधाओ के साथ अपने चारो बेटो की शिक्षा की व्यवस्था करवा देते l क्यों अपने नन्हें नन्हें राजकुमारो को दशरथ जी ने गुरुकुल का इतना सख्त जीवन व्यतीत करने के लिए भेज दिया ?! कृष्ण जी की बाल लीलाएँ कौन नही जानता l उनके जन्म के तुरंत बाद ही उन पर सिलसिलेवार आक्रमण शुरू हो गए l उन्होंने अपने शिशु काल मे ही बड़े बड़े राक्षसो को दूसरी दुनिया मे भिजवा दिया था l शिक्षा तो उन्होंने भी प्राप्त की, गुरुकुल का कठोर जीवन तो उन्होंने भी बिताया l जबकि वो यशोदा मईया के कितने लाडले थे l
इसीलिए Nation management & coordination ये सब ऑब्जेक्टिव और नीड ध्यान मे रख हमे नर्सरी क्लास से ही बच्चे के पाठ्यक्रम पर ध्यान देना चाहिए l इसी clay age मे तय हो जाता है कि बच्चा आगे जा कर क्या करेगा ? सो इस नाजुक उम्र कर दौर मे बोध, ज्ञान, संस्कार और शिष्टाचार के बीज ध्यानपूर्वक बच्चे के दिमाग मे रोपित करने चाहिए l इस उम्र मे बच्चा जो सीखता है l उसी फसल को फिर उस बच्चे को, उसके परिवार, समाज, देश और दुनिया को काटना पड़ता है l तभी कहते है कि पूत के पाँव पालने मे ही दिखाई पड़ जाते है l बच्चे के सर्व पक्षीय विकास को ध्यान मे रख कर बनाए गए पाठ्यक्रम और पढ़ाई का बच्चे की जिंदगी, समाज, संस्कृति और सभ्यता, मानवता, देश, दुनिया और विकास पर प्रभाव पड़ेगा l जैसा बीज, वैसा पेड़, जैसा पेड़ वैसे फूल, फल और छाया l
अंग्रेजो द्वारा लागू किया गया एजुकेशन सिस्टम अभी भी हमारे भारत मे चल रहा है !!! 7.3.1835 से अब तक बदले गए परिदृश्य, हालात, ज्ञान, सोच, जरूरते, दायित्व, उद्देश्य, संसाधनो, टेक्नोलॉजी, विकास आदि के अनुसार हमारा education system अच्छे से revised ही नही हुआ l वो तीरो, भालो, बैलगाड़ी, सारा काम हाथ से करने वाला जमाना l और अब नुक्लेअर बम, मिसाइल, जेट, नेट और साइंस का सुपर सोनिक जमाना l तब से अब तक कितना अंतर देखने को मिल रहा है l यह वाला एजुकेशन सिस्टम सिर्फ bio robots , तोता पंडित, अच्छे क्लर्क, अच्छे ताबेदार ही पैदा कर सकता है l इंसान मे divergent thinking, चिंतन और मनन की क्षमता, समाज के प्रति अपने कर्तव्यो का अहसास नही करवाता l
मुझे भी तो B.ed मे यही पढ़ाया गया था कि पढ़ाई लिखाई का मुख्य उद्देश्य इंसान को सिर्फ अपने पेरो पर खड़ा करना ही होता है ! यह भावना इंसान को self centered ही बनाती है l आम जनता के दिमाग मे ज्यादातर यह बात आती ही नही कि उसके समाज और देश के लिए भी कुछ कर्तव्य है l सब अपने रोटी, कपड़ा, मकान और दिखावेबाजी मे व्यस्त है l भारत का तो सारा ही एजुकेशन सिस्टम बदलने वाला है l और इस नए एजुकेशन सिस्टम मे एक और विषय होना चाहिए – देश प्रबंधन और संचालन l क्योंकि देश है तो हम है l देश के विकास मे ही हमारा विकास है l देश की शान के साथ ही हमारी शान है l और देश की संस्कृति और सभ्यता ही हमारी पहचान और नेम प्लेट है l
जैसे बहुत सारे डिपार्टमेंट्स होते है जैसे P&T deptt., police dept.,t education deptt., ठीक ऐसे ही मिनिस्टर और मिनिस्ट्री सिस्टम को खत्म कर के एक Administration deptt. हो l जैसे ministry of road and transport इसकी जगह हो department of road and transport, ministry of external affairs इसकी जगह हो department of external affairs , ministry of health and family welfare तो इसकी जगह हो department of health and family welfare l इन departments के सारे ही कर्मचारी इन्हीं departments की पढ़ाई किए हो l Class 1 से Class 3 तक के सारे ही कर्मचारी l इस administrative department के कर्मचारी IAS IPS IFS PCS टेस्ट की ही तरह एक administrative test के द्वारा चुने जाएँ l प्रधानमंत्री डिपार्टमेंट और राष्ट्रपति डिपार्टमेंट और administrative test देने वालो के लिए एक विशेष प्रकार का पाठ्यक्रम +1 or + 2 , BA, MA , PhD मे पढ़ाया जाए l जैसे Administration & management , Indian & foreign history-both ancient and modern, civics, geography, monuments, languages, basics of math and science, astronomy, environment & ecology, humanity, religion, philospphy, law & its importance, defense, war history, different types of war strategies, martial arts, weaponry, physical fitness, current national & international affairs, socio homely problems, autocracy and democracy & its effects, world famous revolutions and its reasons & its consequences, problems and conditions face by businessman, farmers, labour, hawkers, employees, employer, etc., importance & dignity of tradition, culture, norms, values, discipline, time and punctuality, self reliance, value of work and money, orthodox and rationalism and striking a balance between the two etc. are main
इस सब के बीच मे मीडिया को अपना स्थान, कर्तव्य और महत्व को नही भूलना चाहिए l जैसे एक डॉक्टर शरीर और बीमारियो का इलाज करता है l ठीक ऐसे ही मीडिया कर्मचारी और मीडिया हमारे समाज और भ्रष्टाचार के लिए है l जैसे कि मैने देखा कि राजनीति की ही तरह कोई भी निकम्मा, निठल्ला, बेरोजगार, बिना किसी उचित शिक्षा के मीडिया कर्मी बन जाता है l जो मीडिया और इनफार्मेशन एंड ब्राडकास्टिंग का बंटाधार कर देता है l
फिर इस administrative test के द्वारा चुना गया व्यक्ति by seniority & capability देश का शासक बने l हर डिपार्टमेंट को lead करने वाला अपने डिपार्टमेंट के विषय मे PG, M.Phil, Ph.D हो l जिन्होंने BA, MA administrative subjects के साथ नही की l उनको स्पेशल केस मे after graduation special MA course के द्वारा Administration/Nation management & administration me PG करने का मौका दिया जाए l जिन्होंने BA Nation Management & administration मे किया हो l उन्हें B.ed करने का मौका दिया जाए l जो कक्षा दसवीं तक को पड़ा सकते हो l इसके साथ अपने मन पसंद विषय पर masters करने के बाद वो +1, +2 और आगे की क्लासो को भी पढ़ाने का मौका दिया जाए l कोई आलतू फालतू के incentives और सुविधाएँ ना दी जाएँ l ये बाते इंसान को ego centric बनाती है l देश को लाल बहादुर शास्त्री जी और अब्दुल कलाम जी जैसे शासको की जरुरत है ना कि show off करने वाले ego centric, लोकतांत्रिक तानाशाहो, मरासियो, भांड, बहुरूपियो और पल पल गिरगिट की तरह रंग बदलने वालो की l ये सब राजनीति मे नही देश दीमकनीति मे आता है l ऐसे ही लोगो पर काम, क्रोध, मोह, लोभ, अंह, ईर्ष्या छ्ल, हठ, द्वेष, सनक आदि का ज्यादा और जल्दी असर होता है l जिन्हें पता ही ना हो कि धैर्य, संयम, आत्म नियंत्रण, दूरदर्शिता, मानवता, धर्म, सदाचारी, सच, परिश्रम, स्वावलंबन, नेकी, दायित्व, जिंदगी और परमार्थ का जीवन मे क्या महत्व है ? एक ऐसा शासक जिसके लिए देश, देश हित, जन कल्याण, इंसानियत, मूल्य, आदर्श, परम्पराएँ, मान्यताएँ, विकास, ज्ञान, शिक्षा, नैतिकता, सामाजिकता, सौहार्द, जुल्म का दमन करने की शक्ति सर्वोपरि हो l और जिस मे ‘मैं’, ‘अंह’, ‘दम्भ’ शून्य हो l
इस तरह देश को एक पढ़ा लिखा, सभ्य, समझदार, अनुभवी, संतुलित मानसिकता वाला, सदाचारी, दूरदर्शी, सुलझा हुआ और उच्चाधिकारी तथा योग्य प्रशासकीय शासक मिलेगा l सर्वोच्चाधिकारी पर भी देश का कानून उसी तरह ही लागू होगा जैसे किसी और कर्मचारी, नागरिक पर लागू होता है l किसी भी तरह के भ्रष्टाचार मे लिप्त पाए जाने पर इस सर्वोच्च प्रशासकीय अधिकारी के लिए विशेष कठोर दंड हो l अगर इतनी पढ़ाई, लिखाई, सिखलाई और अनुभव के बाद भी वो किसी तरह का भ्रष्टाचार, देशद्रोह, भारत माता की अस्मिता पर प्रहार, भारतीयता को किसी भी प्रकार से नुक्सान पहुँचाए और कलंकित करे तो उसके सारे ही परिवार को कठोर दंड दिया जाए l
जैसे हमारे देश मे अपराधी को शरण देने वाला, अपराधी की किसी भी तरह से मदद करने वाला, कानून से सच छुपाने वाला भी अपराधी होता है l अपराधी के द्वारा अपराध से कमाए गए काले और हराम के पैसे, कीमती चीजे, जमीन जायदाद आदि का भोग और उसका फायदा उसके परिवार वाले भी पूरा पूरा उठाते है l सरकार से, कानून से सच छुपाते है l तो फिर सजा अकेले सिर्फ अपराधी को ही क्यों ? अगर जरुरत पड़े तो अपराधी के निकटतम मित्र, रिश्तेदार, तक को भी सजा दी जाए l जिन्हे एक अपराधी का साथ दिया और देश, समाज, कानून को अंधेरे मे रखा l यह सर्वोच्च प्रशसकीय अधिकारी किसी आम आदमी से ज्यादा गुनहगार है l क्योंकि उस पर विश्वास करके ही उसे देश की बागडोर और जिम्मेदारी सौंपी गई l और अगर वो कोई अपराध करता है तो वो कोई साधारण अपराधी नही l वो देश का अपराधी है, वो देश की जनता-एक एक नागरिक का अपराधी है, वो भारत माता का अपराधी है l वो विश्वास का अपराधी है l ऐसे अपराधी का अपराध यह सोच कर ना छुपाया जाए कि इस से देश की बदनामी होगी l ऐसे व्यक्ति को तो सब के सामने सजा दी जाए l तांकि सब को पता चले कि कानून सब से ऊपर है l सब को कान हो जाए कि कानून से खिलवाड़ करने वाले को बक्शा नही जाएगा l कानून की निगह मे सब एक समान है l ऐसा करने से कानून सब से ऊपर होगा और भ्रष्टाचार शून्य पर होगा l यानि अगर किसी के दिमाग मे कही हल्की सी भी खुराफात सिर उठाने की कोशिश कर भी रही होगी तो कानून और उसको सख्ताई से अम्ल मे लाने की वजह से कोई आपराधिक गतिविधि के बारे मे भी नही सोचेगा l
बिना मंत्री और मंत्रालय के प्रशासकीय अधिकारियो द्वारा देश की बागडोर संभालने वाले तंत्र को तो मैं प्रशासकीय तंत्र/adminocracy कहूँगी l यह adminocracy democracy का ही एक सुधरा हुआ रूप, up grade version है l
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