

NCERT की 9वीं सोशल साइंस किताब से संविधान की प्रस्तावना हटाई
9वीं कक्षा की सोशल साइंस किताब में किया गया बड़ा बदलाव
शिक्षा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में चर्चा तेज
NCERTयह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब किताब में इमरजेंसी पर एक नया सेक्शन जोड़ा गया है, जिसमें इसे भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। National news Ncert social science book cnstitution preamble removed
नई पुस्तक ‘Understanding Society: India and Beyond’ में संविधान के निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मौलिक अधिकारों पर चर्चा की गई है, लेकिन प्रस्तावना में शामिल प्रमुख शब्दों जैसे ‘सोवरेन’, ‘सोशलिस्ट’, ‘सेक्युलर’, ‘डेमोक्रेटिक’ और ‘रिपब्लिक’ का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। इसी बदलाव को लेकर शैक्षिक हलकों में बहस शुरू हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि संविधान की मूल भावना को छात्रों तक किस रूप में पहुंचाया जा रहा है और इससे पाठ्यक्रम की समझ पर क्या असर पड़ेगा।
किताब में इमरजेंसी को लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। इसमें कहा गया है कि 1977 के चुनावों के बाद जनता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए बदलाव किया, जिसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण माना गया है। इसके साथ ही किताब में जयप्रकाश नारायण के आंदोलन और छात्र आंदोलनों की भूमिका को भी विस्तार से शामिल किया गया है, जिसने उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों को प्रभावित किया।
पुस्तक में 1970 के दशक में बढ़ती राजनीतिक असंतोष, बेरोजगारी और महंगाई के कारण हुए आंदोलनों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि 1975 में देश में आपातकाल लागू किया गया, जिसके दौरान कई मौलिक अधिकार निलंबित रहे और प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई। इसी हिस्से में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़े प्रभाव और उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों को छात्रों के सामने रखा गया है।
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