Himachal के इन क्षेत्रो मे हिली धरती, लोगो मे डर व दहशत का बना माहौल
देश का सबसे अधिक भूकंपीय जोखिम वाला जोन क्षेत्र हैं कांगड़ा-चंबा क्षेत्र
चंडीगढ, 6 नवंबर (विश्ववार्ता) बैजनाथ। Earth tremors felt early this morning in Himachal’s Kangra and Chamba, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और चंबा जिले में शुक्रवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह की शुरुआत के साथ धरती में हुई इस हलचल ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता की ओर ध्यान खींचा है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.2 मापी गई।
भूकंप सुबह 6 बजकर 59 मिनट पर आया। इसका केंद्र जमीन के भीतर करीब 15 किलोमीटर की गहराई में दर्ज किया गया। कांगड़ा और चंबा क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियों के मद्देनजर यह घटना एक बार फिर लोगों को सतर्क रहने का संदेश दे रही है। उल्लेखनीय है कि कांगड़ा और चंबा में पिछले कुछ सालों से लगातार भूकंप के छोटे झटके दर्ज किए जा रहे हैं।
भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है कांगड़ा-चंबा क्षेत्र
हिमाचल प्रदेश का अधिकांश पर्वतीय क्षेत्र भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार कांगड़ा और चंबा सहित कई जिले उच्च भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्र में आते हैं। हिमालय की भूगर्भीय संरचना और सक्रिय टेक्टोनिक प्रक्रियाओं के कारण इस क्षेत्र में समय-समय पर छोटे-बड़े भूकंप आते रहते हैं।
केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में संसद में दी गई जानकारी में भी कांगड़ा-चंबा-धर्मशाला क्षेत्र को भूकंपीय जोन-V में शामिल बताया था। यह देश का सबसे अधिक भूकंपीय जोखिम वाला जोन है।
सावधानी ही बचाव
भूकंप के झटके महसूस होने पर घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान पर पहुंचें। घर के भीतर हों तो मजबूत मेज के नीचे शरण लें, खिड़कियों और भारी सामान से दूर रहें तथा लिफ्ट का इस्तेमाल न करें। झटके रुकने के बाद ही सावधानीपूर्वक खुले स्थान की ओर जाएं।
कांगड़ा की धरती ने 1905 में प्रकृति की ताकत का भयावह रूप देखा है। इतिहास की यह घटना आज भी एक सीख देती है कि प्राकृतिक आपदा को रोका नहीं जा सकता, लेकिन जागरूकता, सुरक्षित निर्माण और समय रहते तैयारी से इसके नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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