दिल्ली सहित पांच राज्यों में आज से शुरू हो रहा है वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण …
इन पांच कारणों से कट सकता है नाम
दिल्ली, 30 जून, 2026 (विश्ववार्ता) कर्नाटक, दिल्ली, महाराष्ट्र, मेघालय और झारखंड में 30 जून से मतदाता सूची के विशेष सघन संशोधन की प्रक्रिया शुरू हो रही है। इस अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) 29 जुलाई तक घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस संशोधन प्रक्रिया में पहचान के लिए पासपोर्ट को एक वैध दस्तावेज माना जाएगा। Special intensive revision of voter
मैपिंग का आधार: जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हुई है, वे बिहार या पश्चिम बंगाल में हुए अंतिम एसआईआर (SIR) के रिकॉर्ड को आधार बनाकर अपनी मैपिंग करा सकते हैं। झारखंड में रहने वाले अन्य राज्यों के मतदाता भी अपने राज्य में हुए अंतिम एसआईआर के वर्ष को आधार बना सकेंगे।
नाम हटवाना जरूरी: यदि किसी मतदाता का नाम बिहार या पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में पहले से दर्ज है और वह उसी आधार पर झारखंड का मतदाता बनना चाहता है, तो उसे पहले संबंधित राज्य की मतदाता सूची से अपना नाम हटवाना होगा। इसके लिए फॉर्म-7 भरना अनिवार्य होगा।
नए वोटरों को राहत: ऐसे मतदाताओं की संतान, जो पहली बार वोटर बन रही है, वे अपने पिता के नाम और रिकॉर्ड के आधार पर सीधे मैपिंग करा सकेंगे।
घर पर नहीं मिले तो तीन बार आएंगे बीएलओ
यदि सर्वे के दौरान आपका घर बंद मिलता है, तो बीएलओ फार्म को घर में डाल देंगे। वे फार्म कलेक्ट करने के लिए कम से कम तीन बार घर का चक्कर लगाएंगे।
इन पांच कारणों से कट सकता है नाम
- बीएलओ के तीन बार आने पर भी आपका अनुपस्थित मिलना।
- बिना पता बदलवाए दूसरी जगह शिफ्ट हो जाना।
- मतदाता की मृत्यु हो जाना।
- मतदाता सूची में दो जगह नाम होना।
- विदेशी नागरिक होना।
बेघरों और विस्थापितों के लिए विशेष व्यवस्था
अशोक कुमार ने बताया कि हाल ही में चले अतिक्रमण विरोधी अभियान के कारण जिनके घर टूटे हैं और वे इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पा रहे हैं, उनके लिए चुनाव आयोग से चर्चा कर विशेष व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा बेघर लोगों ने जहां कहीं का भी या जिस ‘पोल’ (खंभे) का पता दिया है, वहां तक फार्म पहुंचाए जाएंगे, ताकि कोई भी मतदाता छूटने न पाए।
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