काला धन अधिनियम के तहत 35,104 करोड़ की माँग, वसूली केवल 338 करोड़: Karna Bir Singh Sidhu ने Finance Minister से विदेशी संपत्ति के आँकड़ों को राजस्व में बदलने का किया आग्रह
चंडीगढ, 5 अक्तूबर, 2026 (विश्ववार्ता)संसद में सरकार के अपने उत्तरों का हवाला देते हुए पंजाब के पूर्व विशेष मुख्य सचिव कर्ण बीर सिंह सिद्धू ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर बताया है कि काला धन अधिनियम, 2015 के तहत ₹35,104 करोड़ की माँग के विरुद्ध केवल लगभग ₹338 करोड़ की वसूली हुई है। चीन से सीख लेते हुए, जिसने अपने नागरिकों को ऑफ़शोर ट्रस्टों में रखी संपत्ति पर 20 प्रतिशत कर चुकाने के लिए 22 अक्टूबर तक का समय दिया है।
संसद में सरकार के अपने उत्तरों का हवाला देते हुए कर्ण बीर सिंह सिद्धू बताते हैं कि जुलाई 2015 से मार्च 2025 के बीच इस अधिनियम के तहत जुर्माने सहित ₹35,104 करोड़ की माँगें उठाई गईं, जिनके विरुद्ध केवल लगभग ₹338 करोड़ की वसूली हुई। पनामा और पैराडाइज़ पेपर्स में भारत से जुड़ी 930 इकाइयों के विरुद्ध ₹20,353 करोड़ की अघोषित जमाराशियों का पता चला, जबकि अक्टूबर 2021 तक वसूला गया कर ₹153.88 करोड़ था।
Finance Minister Nirmala Sitharaman,
“अब पता लगाना बाधा नहीं रहा। बाधा वसूली है,” कर्ण बीर सिंह सिद्धू ने कहा। “भारत को 2017 से सौ से अधिक देशों और क्षेत्राधिकारों से वित्तीय खातों की जानकारी मिल रही है, और 2019 से स्विस खातों के आँकड़े। आँकड़े पहले से सरकार के पास हैं। कमी एक ऐसी चिह्नित टीम की है, जिसे इन्हें राजस्व में बदलने का ज़िम्मा सौंपा जाए।”
यह पत्र ऐसे समय आया है जब चीन की नब्बे दिन की समय-सीमा 22 अक्टूबर को समाप्त हो रही है। तब तक वहाँ के निवासियों को ऑफ़शोर ट्रस्टों में रखी संपत्ति पर, और उन ट्रस्टों से होने वाली आय पर, 20 प्रतिशत आयकर घोषित करके चुकाना है; यह देनदारी जनवरी 2023 तक पीछे जाती है। बीजिंग ने कर अधिकारियों, जाँच विशेषज्ञों और नियामकों की विशेष टीमें गठित की हैं, जिनमें से कुछ को एक-एक अरबपति का मामला सौंपा गया है।
Former Special Chief Secretary of Punjab Karn Bir Singh Sidhu
“भारत को चीन जैसी सख़्ती अपनाने की न ज़रूरत है, न उसे अपनानी चाहिए,” कर्ण बीर सिंह सिद्धू ने कहा। “फिर भी प्रशासनिक सबक़ अपनी जगह कायम है। आँकड़ों से राजस्व तभी मिलता है जब किसी को उसकी वसूली का ज़िम्मेदार बनाया जाए।”
अपने पत्र में, वर्ष 2010 से 2012 तक पंजाब के प्रधान सचिव (वित्त) रहे कर्ण बीर सिंह सिद्धू ने राजस्व विभाग की मौजूदा शक्तियों के भीतर तीन उपाय सुझाए हैं।
पहला, सीबीडीटी, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और वित्तीय आसूचना इकाई (एफ़आईयू-इंड) का एक संयुक्त विदेशी संपत्ति वसूली प्रकोष्ठ, जिसे फ़ॉरेंसिक लेखाकारों का सहयोग हो और जिसमें नामित अधिकारी सबसे बड़े मामलों की ज़िम्मेदारी पता लगाने से लेकर वसूली तक संभालें।
दूसरा, सीबीडीटी और ईडी, दोनों की ओर से संसद के समक्ष एक वार्षिक विवरण, जिसमें उठाई गई माँगों और की गई कुर्कियों के साथ-साथ वास्तव में वसूली गई राशि और विदेश से वास्तव में वापस लाई गई संपत्ति दर्शाई जाए।
तीसरा, दो या तीन देशों के साथ एक प्रायोगिक पहल, जिसमें कर मामलों में पारस्परिक प्रशासनिक सहायता पर बहुपक्षीय अभिसमय और भारत की कर संधियों के वसूली-संबंधी प्रावधानों के माध्यम से विदेश में भारतीय कर की वसूली की जाए। अब तक इन साधनों का उपयोग मुख्यतः सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए हुआ है।
उनका कहना है कि इनमें से किसी भी कदम के लिए नए क़ानून की आवश्यकता नहीं है, और पहले दो की घोषणा केंद्रीय बजट 2027–28 में की जा सकती है।
कर्ण बीर सिंह सिद्धू कर और संपत्ति के बीच का अंतर भी स्पष्ट करते हैं। काला धन अधिनियम अघोषित विदेशी आय पर कर लगाता है, जबकि धन-शोधन और विदेशी मुद्रा क़ानूनों के तहत ईडी की शक्तियाँ स्वयं संपत्ति तक पहुँचती हैं। ईडी की 2025–26 की वार्षिक रिपोर्ट में ₹81,422 करोड़ की संपत्ति कुर्क किए जाने और ₹63,142 करोड़ पीड़ितों को लौटाए जाने का उल्लेख है। किंतु ये मुख्यतः घरेलू मामलों से जुड़े हैं, और विदेश से वास्तव में वापस लाई गई संपत्ति का कोई आँकड़ा प्रकाशित नहीं होता।
वे इसकी तुलना संयुक्त राज्य अमेरिका से करते हैं, जो अपने नागरिकों और ग्रीन-कार्ड धारकों की विश्वव्यापी आय पर कर लगाता है और विदेशी खातों की सख़्त रिपोर्टिंग लागू करता है। वहाँ के ऑफ़शोर स्वैच्छिक प्रकटीकरण कार्यक्रम के तहत 56,000 से अधिक करदाताओं ने अनुपालन किया और 11 अरब डॉलर से अधिक की वसूली हुई।
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