‘84 के ज़ख्म’ और ‘चिट्टे का दर्द’ पंजाब के दो गहरे दाग: भाजपा के ‘ज़ख्म 84 के’ सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर साधे तीखे निशाने
भावुक माहौल में दिन की शुरुआत हुई, शहीदों की आत्मिक शांति के लिए अरदास और पुरानी तस्वीरों की प्रदर्शनी के माध्यम से 1984 के दर्दनाक मंजरों को किया गया याद
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सांसद रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस के 42 वर्षों के कथित पर्दा डालने वाले रवैये पर उठाए सवाल; राहुल गांधी से पूछा कि उनकी पार्टी ने सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर और कमलनाथ को क्यों दिया संरक्षण
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने पंजाब में रैलियां कर 42 साल पुराने न भरे जख्मों पर नमक छिड़कने के लिए कांग्रेस के दोहरे मापदंडों की कड़ी निंदा की
चंडीगढ, 4 नवंबर (विश्ववार्ता) 1984 के नरसंहार के पीड़ित परिवारों और जीवित बचे लोगों की मौजूदगी में बेहद भावुक और गमगीन माहौल के बीच भारतीय जनता पार्टी की पंजाब इकाई द्वारा आज होटल पार्कव्यू, सेक्टर-24, चंडीगढ़ में ‘ज़ख्म 84 के’ नामक सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। Chitte ka Dard’ two deep
दिन की शुरुआत शहीदों की आत्मिक शांति और न्याय की निरंतर लड़ाई की सफलता के लिए की गई पवित्र अरदास के साथ हुई। विचार-विमर्श से पहले नवंबर 1984 के दर्दनाक दृश्यों को दर्शाती एक विशेष ऐतिहासिक तस्वीरों की प्रदर्शनी का उद्घाटन पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं लोकसभा सांसद रविशंकर प्रसाद, पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और प्रदेश प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया द्वारा किया गया।
इस प्रदर्शनी में त्रिलोकपुरी के जलते हुए घरों, कनॉट प्लेस के जला दिए गए प्रतिष्ठानों, अपने बचे-खुचे सामान को संभालते हुए बेघर हुए परिवारों और बसों से सिखों को जबरन बाहर निकाले जाने जैसे दिल दहला देने वाले दृश्यों को प्रदर्शित किया गया। इन तस्वीरों ने उस दर्दनाक दौर की यादें ताजा कर दीं और पूरे कार्यक्रम को गंभीर एवं चिंतनशील माहौल प्रदान किया।
उद्घाटन सत्र को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पटना साहिब से सांसद रविशंकर प्रसाद ने पीड़ित परिवारों की मौजूदगी में अपना गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया।
उन्होंने कहा, “आज पंजाब की आत्मा पर दो गहरे दाग हैं—‘84 के जख्म’ और ‘चिट्टे का दर्द’। इन जख्मों पर मरहम तब तक नहीं लग सकता, जब तक बिना किसी समझौते के न्याय नहीं मिलता।”
कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए प्रसाद ने पंजाब में उनके राजनीतिक कार्यक्रमों के समय और मंशा पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा, “1 नवंबर को कांग्रेस ने दिल्ली में रैली की और आज यहां पंजाब में राजनीतिक कार्यक्रम कर रही है। इन ताजा जख्मों पर नमक छिड़कने की क्या जरूरत है? 19 नवंबर 1984 को राजीव गांधी द्वारा दिया गया विवादित बयान—‘जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है’—हजारों निर्दोष सिखों के नरसंहार को जायज ठहराने की कोशिश थी।”
उन्होंने आगे कहा, “अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में मैंने उस भयावह बयान का वीडियो दोबारा सार्वजनिक अभिलेखागार में उपलब्ध करवाना सुनिश्चित किया, जो सार्वजनिक रिकॉर्ड से गायब हो चुका था।”
राहुल गांधी से सीधे सवाल करते हुए उन्होंने कहा, “आपके पिता के उस बयान पर आपका क्या रुख है? आपने या आपके परिवार ने आज तक देश से दिल से माफी क्यों नहीं मांगी?”
चार दशकों से चले आ रहे कथित संस्थागत पर्दा डालने के रवैये की निंदा करते हुए प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस का फार्मूला हमेशा ‘लटकाना, भटकाना और झटकाना’ रहा है।
उन्होंने एक के बाद एक आयोगों के गठन का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस की मंशा कभी भी पीड़ितों को न्याय दिलाने की नहीं थी।
उन्होंने कहा, “डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान भी इन आरोपियों को सजा दिलाने में सफलता नहीं मिली।”
उन्होंने आगे कहा, “कांग्रेस को 3,500 निर्दोष लोगों की मौत की कोई चिंता नहीं थी। उसने अपनी पूरी ताकत सिर्फ तीन-चार प्रमुख नेताओं को बचाने में लगा दी। यह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार थी, जिसने एसआईटी का गठन किया और जस्टिस ढींगरा की सिफारिशों को लागू करवाया, जिसके बाद सज्जन कुमार जैसे नेताओं को सजा मिल सकी।”
इस अवसर पर उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फूलका द्वारा अदालत में न्याय के लिए लड़ी गई लंबी और दृढ़ कानूनी लड़ाई की भी सराहना की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने सभागार में मौजूद पीड़ित परिवारों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि 42 वर्ष बीत जाने के बावजूद राजीव गांधी द्वारा दी गई वह बेरहम दलील आज भी रूह कंपा देती है।
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