अर्थ :-जो मनुख गुरु के हुक्म में चलता है उस का जन्म मरन का चक्र खत्म हो जाता है, वह भगवान की हजूरी में आदर लेता है। गुरु के सनमुख मनुख खोटे और खरे कामों का भेती हो जाता है (इस लिए खोटे कामों में फँसता नहीं और) अढ़ोलता में उस की सुरति जुड़ी रहती है। गुरमुखि मनुख भगवान की सिफ़त-सालाह के द्वारा भगवान की हजूरी में टिका रहता है, (इस तरह) हे नानक ! गुरमुख (की जिंदगी) के मार्ग में (विकारों की) कोई रोक नहीं पड़ती।41। गुरु के हुक्म में चलने वाला मनुख निरंजन का नाम प्राप्त करता है (क्योंकि) वह (अपनी) हऊमै गुरु के शब्द के द्वारा जला देता है। गुरु के सनमुख हो के मनुख सच्चे भगवान के गुण गाता है और सदा कायम रहने वाले भगवान में लीन रहता है। सच्चे नाम में जुड़े रहने के कारण गुरमुख को ऊँची इज्ज़त मिलती है, हे नानक ! गुरमुख मनुख को सारे भवनाँ की सोझी हो जाती है (भावार्थ, गुरमुख को यह समझ आ जाती है कि भगवान सारे ही भवनाँ में मौजूद है)।