Sri Akal Takht Sahib द्वारा खारिज किए गए बेअदबी कानून पर Punjab government’का जवाब
– संशोधनों पर आम सहमति बनाने के लिए सिख एक्सपर्ट्स की बनाई गई कमेटी
– पंजाब सरकार कानून पर आम सहमति बनाने के लिए दो महीने के अंदर श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा बनाई गई कमेटी के साथ कोऑर्डिनेट करेगी- जत्थेदार गरगज्ज
श्री अमृतसर,चंडीगढ, 30 जुलाई, 2026 (विश्ववार्ता) श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज्ज ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी रोकने के कानून के बारे में पंजाब सरकार द्वारा कल दिए गए जवाब के बारे में कहा कि सरकार के जवाब से यह साफ है कि वह श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा भेजी गई भावना के अनुसार कानून में और संशोधन करने के लिए तैयार नहीं है।
उन्होंने कहा कि 29 जून, 2026 को पंजाब विधानसभा के जो सिख MLA और कैबिनेट मंत्री दी गई सहमति लेकर अकाल तख्त साहिब गए थे, सरकार के जवाब में सरकार की भावनाएं पूरी नहीं हुई हैं। सरकार ने श्री अकाल तख्त साहिब की तरफ से भेजे गए एतराज़ और पॉइंट में से सिर्फ़ एक को माना है, जबकि बाकी पर अभी भी अड़ियल रवैया अपनाया हुआ है और सरकार ने जवाब भेजने से पहले समय पर तालमेल का रास्ता भी नहीं खोला है। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से भेजा गया जवाब संतोषजनक नहीं है, इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज्ज ने कहा कि अगर सरकार को कानून को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब से आगे बातचीत करनी है, तो इसके लिए एक कमेटी बनाई गई है, जिसमें जस्टिस (रिटायर्ड) रूपिंदर सिंह सोढ़ी, जस्टिस (रिटायर्ड) मोहिंदर मोहन सिंह बेदी, सीनियर एडवोकेट पूरन सिंह हुंदल, सिख विद्वान डॉ. केहर सिंह पटियाला, प्रो. जगमोहन सिंह लुधियाना और शिरोमणि कमेटी के चंडीगढ़ सब-ऑफिस में सेक्रेटरी लखवीर सिंह कोऑर्डिनेटर के तौर पर शामिल किया गया है।Punjab government’
उन्होंने कहा कि सरकार को श्री अकाल तख्त साहिब की तरफ से बनाई गई कमेटी से संपर्क बनाकर कानून को लेकर आम सहमति बनानी चाहिए और यह काम दो महीने के अंदर हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब से बातचीत का रास्ता अभी भी खुला है लेकिन सरकार को साफ इरादे से आगे बढ़ना चाहिए और किसी भी तरह की चालबाजी नहीं करनी चाहिए।
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज्ज ने कहा कि 29 जून 2026 को जब सभी सिख MLA और कैबिनेट मंत्री श्री अकाल तख्त साहिब आए थे, तो उन्हें सिख भावना का मुद्दा गंभीरता से समझाया गया था और वे पांच जयकारे लगाने और हाथ ऊपर उठाने के बाद उठाई गई आपत्तियों को हटाने पर सहमत हो गए थे। उन्होंने कहा कि कस्टोडियन के दोनों प्रावधानों को हटाने पर सहमति बनी थी, लेकिन सरकार की तरफ से ऐसा कोई जवाब नहीं आया, बल्कि इन प्रावधानों की वकालत सिर्फ एक्ट के बारे में बनाए जा रहे नियमों के संदर्भ में की गई है। अगर सरकार के नुमाइंदे दिए गए समझौते से पीछे हटते हैं, तो श्री अकाल तख्त साहिब इसका कड़ा नोटिस लेगा और उचित कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सभी सिख MLA और मंत्रियों की यह जिम्मेदारी है कि वे सिख होने के नाते अपने कर्तव्य को पहचानें और सरकार से श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा दर्ज सिख भावनाओं के अनुसार कानून में बदलाव करने के लिए कहें। उन्होंने कहा कि जब श्री अकाल तख्त साहिब से आदेश मान लिए जाते हैं, तो उसकी भावनाओं के हिसाब से काम पूरा करना बहुत ज़रूरी हो जाता है। उन्होंने कहा कि बातों से मान लेने से श्री अकाल तख्त साहिब को बरगलाया नहीं जा सकता। बेअदबी के गुनहगार के लिए सज़ा सरकार तय कर सकती है, लेकिन बाकी कानून श्री अकाल तख्त साहिब ने पहले ही रद्द कर दिए हैं।
जत्थेदार गरगज्ज ने कहा कि कस्टोडियन तय करना सरकार का अधिकार क्षेत्र नहीं है, सरकार का अधिकार सिर्फ़ बेअदबी के गुनहगार को सज़ा देना है, चाहे वह कितनी भी गंभीर हो, इसमें कोई एतराज़ नहीं है। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब को कस्टोडियन के उस मतलब की ज़रूरत नहीं है जो सरकार ने दिया है। उन्होंने साफ़ किया कि कस्टोडियन के दोनों क्लॉज़ हटा दिए जाने चाहिए क्योंकि धर्म में दखलंदाज़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जत्थेदार गरगज्ज ने कहा कि सरकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्र किताब को एक यूनिक नंबर देने का मामला तय नहीं कर सकती। पंजाब सरकार यह तय नहीं कर सकती कि पवित्र ग्रंथों का रिकॉर्ड वेबसाइट पर कैसे डाला जाए या सेंट्रल रजिस्टर कैसे मेंटेन किया जाए, क्योंकि यह SGPC के अंदरूनी एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम का हिस्सा है, जिसे संगठन ने पहले ही ठीक से मैनेज कर रखा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से फाइल किए गए जवाब में यह भी कहा गया है कि अगर कोई डेरा प्रमुख अपने फॉलोअर्स को बेअदबी करने के लिए उकसाता है, तो उसे भी कस्टोडियन एक्ट के सेक्शन 2 (1) (AA) के तहत कस्टोडियन माना जाएगा, जबकि एक्ट के मुताबिक, कस्टोडियन वह होता है जिसके पास श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्र किताब होती है। सरकार के जवाब में यह एक बड़ी चूक है, जिसके नतीजों का अंदाजा श्री अकाल तख्त साहिब ने पहले ही लगा दिया है। उन्होंने कहा कि जो बेअदबी कर रहा है, वह कस्टोडियन कैसे हो सकता है? उन्होंने कहा कि सरकार ने कहा है कि वह बेअदबी के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए इंसाफ दिलाने के लिए समय पर कदम उठाएगी, लेकिन इसे मैड एक्ट में शामिल करना जरूरी है। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने पंजाब विधानसभा के सभी सिख MLA और कैबिनेट मंत्रियों से अपील की कि वे यह पक्का करें कि 3 अगस्त से शुरू हो रहे विधानसभा के सेशन में बेअदबी कानून के मुद्दे पर कोई चर्चा न हो और जब तक श्री अकाल तख्त साहिब और शिरोमणि कमेटी के साथ आम सहमति नहीं बन जाती, तब तक कानून में और बदलाव के लिए कोई मंज़ूरी न दें।
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि वह अपने किस सीक्रेट सलाहकार से सलाह ले रही है, जबकि 29 जून को उन्होंने MLA और मंत्रियों से साफ-साफ कहा था कि उनका मोबाइल हर समय ऑन रहता है और सरकार जब चाहे उनसे संपर्क करके सलाह ले सकती है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
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