
Punjab News: अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पंजाबी भाषा के विकास के लिए साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के बीच आपसी सहयोग आवश्यक – Prof. Gurbhajan Singh Gill
लुधियाना, चंडीगढ, 19 नवंबर, 2025 (विशवार्ता) पंजाब: पंजाबी राइटर्स एसोसिएशन सिएटल द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘कलमी रमज़ान-4’ का लोकार्पण गुजरांवाला गुरु नानक खालसा कॉलेज लुधियाना के प्रवासी साहित्य अध्ययन केंद्र द्वारा किया गया। इस पुस्तक का संपादन बलिहार सिंह लेहल (सिएटल), मंगत कुलजिंद और प्रितपाल सिंह तिवाना ने किया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोक विरासत अकादमी लुधियाना के अध्यक्ष Prof. Gurbhajan Singh Gill ने की।
उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पंजाबी भाषा के विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के बीच आपसी सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपसी आदान-प्रदान से पंजाबी भाषा के विकास से जुड़े कई मुद्दों का समाधान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पंजाबी साहित्य का सिएटल (अमेरिका) से बहुत पुराना नाता है। बलवंत गार्गी की पत्नी जेनी गार्गी सिएटल की रहने वाली थीं।
Prof. Gurbhajan Singh Gill
उन्होंने कहा कि सिएटल के अन्य लेखकों को भी कलमी रमज़ान-4 में शामिल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि वे सिएटल निवासी दिवंगत पंजाबी कवि हरभजन सिंह बैंस के संपूर्ण काव्य संग्रह “तेरे जाना भाई” का भूपिंदर सिंह मल्ही और उनके परिवार के सहयोग से संपादन कर रहे हैं।
पंजाबी लेखक संघ सिएटल के अध्यक्ष प्रितपाल सिंह टिवाना और सदस्य लकी कमल ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर के पूर्व कुलपति और गुजरांवाला खालसा एजुकेशनल काउंसिल लुधियाना के अध्यक्ष डॉ. एस. पी. सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हमें खुशी है कि प्रवासी साहित्य अध्ययन केंद्र ने दुनिया भर के उभरते पंजाबी लेखकों के दिलों में एक सार्थक जगह बनाई है। प्रवासी केंद्र प्रवासी पंजाबी साहित्य के उत्कर्ष के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। Prof. Gurbhajan Singh Gill
प्रो. मंजीत सिंह छाबड़ा, निदेशक, जीजीएनआईएमटी लुधियाना ने कलमी रमज़ान-4 पुस्तक पर चर्चा करते हुए कहा कि इस पुस्तक में 31 लेखकों की रचनाएँ शामिल हैं। इसमें कहानियाँ, कविताएँ और लेख शामिल हैं। हमसे शारीरिक रूप से अलग पाँच लेखकों को शामिल करके यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि वे लेखक अपनी रचनाओं के माध्यम से पाठकों के मन में जीवित रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में अधिकांश लेखक वे हैं जिनकी अभी तक अपनी कोई मौलिक पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई है। यह पुस्तक उन लेखकों के लिए प्रोत्साहन का स्रोत सिद्ध होगी।
स्नातकोत्तर पंजाबी विभागाध्यक्ष प्रो. शरणजीत कौर लोची ने पंजाबी लेखक संघ सिएटल की 2009 में स्थापना के बाद से अब तक की उपलब्धियों को श्रोताओं के साथ साझा किया। उन्होंने कहा कि पंजाबी लेखक संघ सिएटल का हमारे केंद्र के साथ लंबे समय से मधुर और प्रेमपूर्ण संबंध रहा है। पंजाबी लेखक संघ सिएटल के अध्यक्ष प्रितपाल सिंह टिवाना ने अप्रवासी साहित्य अध्ययन केंद्र का धन्यवाद करते हुए कहा कि समय की मांग है कि पंजाब और विदेशों की साहित्यिक संस्थाएँ अपनी संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर आपसी समन्वय और सहयोग से पंजाबी भाषा और साहित्य के लिए कार्य करें।
सिएटल से लेखक लकी कमल (नूरपुर बेट) ने अपनी सुंदर कविताएँ श्रोताओं के साथ साझा कीं। इटली में रहने वाले लेखक दलजिंदर राहल ने कहा कि आप्रवासी साहित्य अध्ययन केंद्र द्वारा किए जा रहे ऐसे साहित्यिक प्रयास सराहनीय हैं क्योंकि यह संस्था व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि वे श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी पर्व को समर्पित दिसंबर में इटली में इतालवी और पंजाबी भाषाओं में एक संयुक्त कार्यक्रम भी आयोजित कर रहे हैं।
पंजाबी लेखक कृपाल सिंह पुनी, कोवेंट्री (इंग्लैंड) ने इस अवसर पर कहा कि वे 17 वर्ष की आयु में इंग्लैंड गए और वहाँ उच्च शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने 1960 में कविता लेखन शुरू किया और तब से निरंतर लेखन कर रहे हैं।
कॉलेज की प्राचार्या प्रो. राजिंदर कौर मल्होत्रा ने अतिथियों का औपचारिक रूप से धन्यवाद किया और इस पुस्तक में शामिल लेखकों और संपादक मंडल को अपनी शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर एस. हरशरण सिंह नरूला, मानद महासचिव, गुजरांवाला खालसा एजुकेशनल काउंसिल, लुधियाना, सदस्य कुलजीत सिंह, प्रोफेसर रविंदर सिंह भट्टल, पूर्व अध्यक्ष, पंजाबी साहित्य अकादमी, लुधियाना, डॉ. गुरइकबाल सिंह, पूर्व महासचिव, पंजाबी साहित्य अकादमी, त्रैलोचन लोची और डॉ. गुरचरण कौर कोचर (दोनों उपाध्यक्ष, पंजाबी साहित्य अकादमी, लुधियाना), डॉ. दलीप सिंह, डॉ. अरविंदर कौर, डॉ. मनदीप कौर रंधावा, राजिंदर सिंह संधू और कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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