
राजस्थान में एक सिख बच्ची को क्कार पहनने के कारण ज्यूडिशरी की परीक्षा देने से रोकने का मामला
आप नेता डॉ सनी अहलूवालिया ने घटना की करी सख्त निंदा
राजस्थान सरकार को उन अफसरो पर सख्त एक्शन होना चाहिए जिन्होंने बच्ची को एग्जाम देने से रोका – अहलूवालिया
बच्ची का एग्जाम दोबारा करवाया जाए – अहलूवालिया
चंडीगढ़, 27 जुलाई (विश्ववार्ता) पंजाब की सिख युवती को राजस्थान में राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षा (आरजेएस) में शामिल नहीं होने दिया गया। सिख युवती को उसके धार्मिक प्रतीकों की वजह से परीक्षा केंद्र में जाने से रोक दिया गया। तरनतारन जिले की युवती गुरप्रीत कौर के साथ हुई इस घटना की पंजाब कड़ी निंदा हो रही है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (एसजीपीसी) ने इस घटना को लेकर एतराज जताया है। वहीं शिरोमणि अकाली दल (शिअद) प्रधान व पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने भी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए विरोध जताया है।
सुखबीर बादल ने कहा कि राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षा में चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जहां पंजाब की एक सिख छात्रा गुरप्रीत कौर को पूर्निमा यूनिवर्सिटी जयपुर में परीक्षा केंद्र पर प्रवेश से इसलिए रोक कर दिया गया क्योंकि उसने अपने धार्मिक विश्वास के प्रतीक कड़ा और कृपाण धारण कर रखे थे। यह कड़ा और कृपाण केवल लोहे की वस्तुएं नहीं, बल्कि सिख धर्म की आस्था और पहचान के पवित्र चिन्ह हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता प्राप्त है, जिसमें सिखों को कृपाण धारण करने का विशेष अधिकार शामिल है।






















