
यूपीआई क्रांति: दुनिया ने माना भारत को डिजिटल पेमेंट का राजा
हर महीने होता है इतने अरब का लेनदेन
चंडीगढ, 21 जुलाई (विश्ववार्ता) भारत अब तेज डिजिटल भुगतान के मामले में पूरी दुनिया में सबसे आगे निकल गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की नई रिपोर्ट ‘खुदरा डिजिटल भुगतान का बढ़ता चलन: इंटरऑपरेबिलिटी का महत्व’ के अनुसार, भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) इस क्रांति का मुख्य आधार है।
इस बदलाव का मूल आधार यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) है. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने 2016 में UPI को लॉन्च किया था. इसने देश में लोगों के पैसे भेजने और प्राप्त करने के तरीके को बदल दिया है. यूपीआई आपके बैंक खातों को मोबाइल ऐप में जोड़ता है. आप बस कुछ ही टैप से तुरंत पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं, व्यापारियों को भुगतान कर सकते हैं, या दोस्तों को पैसे भेज सकते हैं. यूपीआई की बड़ी खासियत इसकी तेज गति और इस्तेमाल में आसानी है. वर्तमान में यूपीआई भारत में हर महीने 18 अरब से अधिक लेनदेन करता है।
प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने रविवार को अपनी बैकग्राउंडर्स सीरीज में कहा कि इस बदलाव ने नकद और कार्ड-आधारित भुगतान को कम दिया है और भारत डिजिटल-प्रथम अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है. लाखों व्यक्ति और छोटे व्यवसाय अब सुरक्षित और कम लागत वाले लेनदेन के लिए यूपीआई पर निर्भर हैं. भुगतान को त्वरित और सुलभ बनाकर, यूपीआई वित्तीय समावेशन का एक शक्तिशाली उपकरण बन गया है।
अकेले जून में ही यूपीआई से 24.03 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान और 18.39 अरब लेनदेन दर्ज किया गया. पिछले साल इसी महीने में यूपीआई ट्रांजैक्शन 13.88 अरब था. यानी सिर्फ एक साल में यूपीआई ट्रांजैक्शन में लगभग 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्तमान में 49.1 करोड़ व्यक्ति और 6.5 करोड़ व्यापारी यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं. यह 675 बैंकों को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ती है, जिससे लोग बिना किसी चिंता के आसानी से भुगतान कर सकते हैं, चाहे किस भी बैंक में उनका अकाउंट हो।






















