
बेड पर पड़े बेटे के लिए पिता ने मांगी मौत, Supreme Court ने दिया ये आदेश
मेरे बेटे को मौत दीजिए साहब
चंडीगढ, 12 दिसंबर 2025 (विश्व वार्ता) Supreme Court बीते 13 वर्षों से बिस्तर पर पड़े एक युवक को इच्छा मृत्यु देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एम्स के सेकेंडरी बोर्ड से राय मांगी है। युवक की देखभाल भी ठीक से नहीं हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु मामले की सुनवाई करते हुए बड़ा आदेश दिया है।
दूसरी बार कोर्ट पहुंचे माता-पिता
यह दूसरा मौका है जब हरीश के माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट से हरीश के लिए इच्छामृत्यु की मांग की है। पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र रहे हरीश 2013 में चौथी मंजिल से गिरने के बाद से पूरी तरह बिस्तर पर हैं और लंबे समय से कृत्रिम सहायता पर निर्भर जीवन जी रहे हैं।
कोर्ट ने नोएडा के जिला अस्पताल को हरीश राणा के मामले में पैसिव यूथेनेसिया (निष्क्रिय इच्छा मृत्यु) की संभावना जांचने के लिए एक प्राथमिक मेडिकल बोर्ड तुरंत गठित करने का निर्देश दिया है। हरीणा राणा 100 फीसदी विकलांग है और पिछले 13 साल से अधिक समय से बेड पर हैं। बता दें कि हरीश राणा पंजाब यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट थे. साल 2013 में वह अपने पीजी के चौथी मंजिल से गिर गए थे। गिरने से उनके सिर में चोट लग गई. तब से वह लगातार बेड पर हैं और वेंटिलेटर पर निर्भर हैं। Supreme Court
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने नोएडा सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल को हरीश राणा के पिता की याचिरा पर दो हफ्ते के भीतर बोर्ड की रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है.पिता ने कोर्ट में कहा कि उनके बेटे हरीश की हालत लगातार खराब होती जा रही है और अब वह और पीड़ा नहीं देख सकते। पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि हम चाहते हैं कि प्राथमिक मेडिकल बोर्ड हमें रिपोर्ट दे कि क्या जीवन रक्षक उपचार रोका जा सकता है. बोर्ड अपनी रिपोर्ट जल्दी पेश करे. रिपोर्ट आने के बाद हम आगे की आदेश पारित करेंगे. यह प्रक्रिया दो हफ्ते के भीतर पूरी हो जानी चाहिए। Supreme Court
क्या है चेतनाशून्य अवस्था
चेतनाशून्य अवस्था एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें व्यक्ति जाग तो रहा होता है, यानी आंखें खुली होती हैं, पर उसमें अपने या आसपास के वातावरण के प्रति कोई जागरूकता नहीं होती। केवल कुछ शारीरिक क्रियाएं जैसे नींद-जागने का चक्र जारी रहती हैं। bed ridden last 13 years
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