
Custodial Deaths Case: पुलिस कस्टडी में मौतें सिस्टम पर एक काला धब्बा हैं, यह मंज़ूर नहीं है – Supreme Court
Supreme Court ने सभी राज्यों और केंद्र द्वारा मांगी गई रिपोर्ट जमा न करने पर भी जताई नाराज़गी
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नई दिल्ली, (विश्व वार्ता) Custodial Deaths Case Supreme Court ने कहा कि पुलिस कस्टडी में मौतें (कस्टोडियल डेथ्स केस) सिस्टम पर एक धब्बा हैं और देश इसे अब और बर्दाश्त नहीं करेगा। कोर्ट ने पुलिस स्टेशनों में CCTV पर सभी राज्यों और केंद्र द्वारा मांगी गई रिपोर्ट जमा न करने पर भी नाराज़गी जताई।
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि अगर 16 दिसंबर तक रिपोर्ट जमा नहीं की जाती है, तो संबंधित राज्यों के चीफ सेक्रेटरी और सेंट्रल एजेंसियों के डायरेक्टर को कोर्ट में पेश होकर देरी के बारे में सफाई देनी होगी।
Custodial Deaths Case
एक हिंदी वेबसाइट की रिपोर्ट में कहा गया है कि राजस्थान के पुलिस स्टेशनों में आठ महीनों में 11 कस्टोडियल डेथ्स हुई हैं। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में इस मामले का संज्ञान लिया और 14 अक्टूबर को सभी राज्यों से पुलिस स्टेशनों में CCTV पर रिपोर्ट मांगी। Supreme Court
4 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में कस्टोडियल डेथ केस का संज्ञान लिया। उसने कहा कि पिछले 7-8 महीनों में राजस्थान में पुलिस कस्टडी में 11 लोगों की मौत हुई है। 15 सितंबर को सुनवाई के दौरान, उसने देश भर के पुलिस स्टेशनों में खराब या काम न करने वाले CCTV कैमरों का संज्ञान लिया और केस दर्ज करने का आदेश दिया।
26 सितंबर को कोर्ट ने राजस्थान सरकार से 12 सवाल पूछे। फिर, 14 अक्टूबर को उसने केंद्र सरकार और सभी राज्यों से पुलिस स्टेशनों में CCTV कैमरों पर रिपोर्ट मांगी। Supreme Court
इससे पहले, दिसंबर 2020 में, परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह के मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को हर पुलिस स्टेशन में CCTV कैमरे लगाने और यह पक्का करने का आदेश दिया था कि कोई भी इलाका बिना निगरानी के न रहे। हालांकि, कोर्ट को बताया गया कि कई मामलों में कैमरे या तो लगे ही नहीं थे या खराब थे।
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