Amrit Vele Da Hukamnama श्री हरमंदिर साहिब अमृतसर*
🪷🌸Amrit Vele Da Hukamnama Sri Darbar Sahib | September | Date 10-09-2026 | Ang 589
सलोक मः ३ ॥ बिनु सतिगुर सेवे जीअ के बंधना विचि हउमै करम कमाहि ॥ बिनु सतिगुर सेवे ठउर न पावही मरि जमहि आवहि जाहि ॥ बिनु सतिगुर सेवे फिका बोलणा नामु न वसै मन माहि ॥ नानक बिनु सतिगुर सेवे जम पुरि बधे मारीअनि मुहि कालै उठि जाहि ॥१॥
मानुष सतगुरु की सेवा से बेमुख होकर अहंकार के असरे करम करते है , परन्तु वह करम उनकी आत्मा के लिए बंधन हो जाते है, सतगुरु के बताई गई करम ना करने के कारण उनको कही जगह नहीं मिलती, वह मरते है ( दोबारा ) जनम लेते है , (संसार में) आते है, (फिर) जाते है; सतगुरु की बताई सेवा के बिना ही रह जाते है और उनके बोल भी फीके होते है और ‘नाम’ उनके मन नहीं बस्ता । हे नानक । सतगुरु की सेवा के बिना काला-चेहरा (संसार से ) ले कर चले जाते है और यमपुरी में बंध कर मार खाते है (भाव , इस लोक में काला-चेहरा कमाते है और आगे भी दुखी होते है)।੧।
( Waheguru Ji Ka Khalsa, Waheguru Ji Ki Fathe ) ਗੱਜ-ਵੱਜ ਕੇ ਫਤਹਿ ਬੁਲਾਓ ਜੀ ! ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕਾ ਖਾਲਸਾ !! ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫਤਹਿ !! Read all Previous Hukamnamas
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