पंजाब में पराली जलाने के 2,347 मामले दर्ज
558 मामलों के साथ तरनतारन सबसे आगे
चंडीगढ, 5 नवंबर (विश्ववार्ता) पंजाब में पराली जलाने की कुल 2,347 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से सबसे ज़्यादा 558 मामले तरनतारन ज़िले से सामने आए हैं। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब उत्तर भारत लगातार बढ़ते प्रदूषण के लेवल से जूझ रहा है।
पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड (PPCB) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 4 नवंबर तक इन मामलों में 40.37 लाख रुपये का पर्यावरण जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से अब तक 23.05 लाख रुपये वसूले जा चुके हैं।
अधिकारियों ने बताया कि पंजाब में धान की कटाई के मौसम में पराली जलाने की घटनाएं प्रशासन के लिए एक चुनौती बन गई हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 1,942 खेतों का इंस्पेक्शन किया गया, जिनमें से 868 जगहों पर आग लगने की पुष्टि हुई। 801 मामलों में एनवायर्नमेंटल कंपनसेशन (फाइन) लगाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन के तौर पर 647 FIR दर्ज की गई हैं और 723 मामलों में रेवेन्यू डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ की गई हैं।
इसके अलावा, संबंधित अधिकारियों ने 689 वॉर्निंग नोटिस भी जारी किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर जिलेवार डेटा देखें, तो पराली जलाने की सबसे ज़्यादा 558 घटनाएं तरनतारन में दर्ज की गई हैं। इसके बाद फिरोजपुर में 316, अमृतसर में 207, बठिंडा में 167 और संगरूर में 163 मामले दर्ज किए गए।
अधिकारियों ने कहा, “इससे पता चलता है कि राज्य के कई जिलों में पराली जलाने की समस्या अभी भी बनी हुई है।”
रिपोर्ट के मुताबिक, पटियाला में अब तक पराली जलाने की 110 घटनाएं दर्ज की गई हैं। डिपार्टमेंट ने 67 जगहों का इंस्पेक्शन किया और उनमें से 24 पर आग लगने की पुष्टि की।
अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से 15 मामलों में एनवायरनमेंटल कंपनसेशन (फाइन) लगाया गया है। उन्होंने कहा, “कुल 80,000 रुपये का फाइन लगाया गया, जिसमें से 35,000 रुपये वसूल हो चुके हैं।”
इस बीच, पराली जलाने के संबंध में 21 FIR दर्ज की गई हैं। (FIR) दर्ज की गई हैं और ऐसे 10 मामलों में रेवेन्यू डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ की गई हैं। इसके अलावा, पूरे जिले में 25 वॉर्निंग नोटिस जारी किए गए हैं। PPCB की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में धान के कुल 32.87 लाख हेक्टेयर एरिया में से 85.10 परसेंट पर कटाई पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद, पराली जलाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। अधिकारियों ने कहा, “विभागीय आंकड़ों से पता चलता है कि प्रशासन विभिन्न कदम उठा रहा है – जैसे निरीक्षण, जुर्माना लगाना, एफआईआर दर्ज करना और अन्य सख्त कार्रवाई करना – फिर भी खेतों में आग लगाने की प्रवृत्ति को पूरी तरह से रोकना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।”























