🌸*Amritvele da Hukamnama, Sri Darbar Sahib, Sri Amritsar, 10/04/2025*🌹🌸
बिहागड़ा महला ४ ॥ सभि जीअ तेरे तूं वरतदा मेरे हरि प्रभ तूं जाणहि जो जीइ कमाईऐ राम ॥ हरि अंतरि बाहरि नालि है मेरी जिंदुड़ीए सभ वेखै मनि मुकराईऐ राम ॥ मनमुखा नो हरि दूरि है मेरी जिंदुड़ीए सभ बिरथी घाल गवाईऐ राम ॥ जन नानक गुरमुखि धिआइआ मेरी जिंदुड़ीए हरि हाजरु नदरी आईऐ राम ॥१॥
अर्थ : हे मेरे हरी! हे मेरे प्रभु (सृष्टि के) सारे जीव तेरे (ही पैदा किये हुए) हैं, तूँ (सब जीवों में) मौजूद है, जो कुछ (जीवों के) मन में याद किया जाता है तूँ (वह सब कुछ) जानता है। हे मेरी सुंदर जिन्दे! परमात्मा हमारे अंदर बाहर (हर जगह हमारे) साथ है, जो कुछ हमारे मन में होता है वह सब देखता है, (पर फिर भी) मुकर हम मुकर जाते हैं। हे मेरी सुंदर जिन्दे! अपने मन के पीछे चलने वाले मनुखों को परमात्मा कहीं दूर बस्ता प्रतीत होता है, उनकी की हुई मेहनत व्यर्थ चली जाती है। हे दास नानक! हे मेरी सुंदर जिन्दे! जिन मनुखों ने गुरु की शरण आ के परमात्मा का नाम सुमिरा है उनको परमात्मा हर जगह बस्ता दीखता है॥१॥