BJP की अगुवाई वाली केंद्र सरकार वक्फ एक्ट में संशोधन की आड़ में मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों पर कब्जा करने की कोशिश कर रही
कहा कि प्रबंधन बोर्ड के विस्तार की आड़ में सिख धार्मिक संस्थानों पर भी कब्जा किया जा रहा
सिखों को हिंदूओं से भिन्न करने के लिए अनुच्छेद 25-बी में संशोधन करने की मांग की
चंडीगढ़, 3 अप्रैल (विश्व वार्ता): शिरोमणी अकाली दल की वरिष्ठ नेता और बठिंडा की सांसद बीबा हरसिमरत कौर बादल ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर वक्फ अधिनियम में संशोधन करने की आड़ में मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों पर कब्जा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है तथा कहा है कि सभी अल्पसंख्यक समुदायों को उनकी संपत्तियों और धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन करने की आजादी दी जानी चाहिए।
संसद में अपने जोशीले भाषण में बीबा हरसिमरत कौर बादलने वक्फ (संसोधन विधेयक), पर बोलते हुए वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के मुददे पर झूठी चिंता के लिए भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार को उजागर किया है। उन्होने कहा कि यह स्पष्ट है कि केंद्र संपत्तियों का नियंत्रण अपने हाथ में लेना चाहता है और उन्हे अपनी इच्छानुसार फिर से बांटना चाहता है जबकि दिखावा यह किया जा रहा है कि यह मुस्लिम समुदाय के हित में किया जा रहा है। उन्होने कहा,‘‘ सच्चाई यह है कि संसद में भाजपा का कोई मुस्लिम प्रतिनिधि नही है। उन्होने कहा कि अन्य पार्टियों के सभी 24 सांसदों ने इस विधेयक का विरोध किया है तथा साथ ही विधेयक की समीक्षा के लिए गठित संयुक्त संसदीय कमेटी में शामिल सभी विपक्षी सदस्यों ने भी इसका विरोध किया है।’’
बीबा बादल ने कहा कि जिस पार्टी की पूरी राजनीति पाकिस्तान, मुसलमान और खालिस्तान के इर्द-गिर्द घूमती है, वह मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा कैसे कर सकती है। उन्होने कहा कि विधेयक में राजनीति की बू आ रही है। उन्होने कहा,‘‘तथ्य यह है कि देश में वक्फ की 27 फीसदी संपत्तियां उत्तर प्रदेश में हैं। चूंकि राज्य में डेढ़ साल में चुनाव होने जा रहे हैं, इसीलिए इन संपत्तियों को अपने कब्जे में लेकर उनका गलत इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है।’’
अकाली नेता ने यह भी सवाल किया कि भाजपा अपने एजेंडे पर क्यों चल रही है और सिख समुदाय की आवाज क्यों नही सुनी जा रही, जो सिखों को हिंदूओं से अलग करने के लिए अनुच्छेद 25-बी में सशोधन की मांग कर रही है। उन्होने पूछा,‘‘ इस संबंध में संसद में विधेयक क्यों नही लाया जा रहा?’’ उन्होने आगे कहा ,‘‘ सिख समुदाय को अपने धार्मिक स्थलों पर समुदाय के नियंत्रण को कमजोर किए जाने का भी सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि सरकार उनके प्रबंधन बोर्डों में सरकार के सदस्यों को नामित कर रही है।’’ उन्होने कहा कि श्री हजूर साहिब और तख्त श्री पटना साहिब के प्रबंधन बोर्डों के मामले में ऐसा ही किया गया है। सिक्किम में डांगमार साहिब, हरिद्वारा में ज्ञान गोदरी और भुवनेश्वर में मंगू मठ सहित ऐतिहासिक गुरुघरों मे कब्जा करने की बात करते हुए कहा,‘‘ यहां तक कि हरियाणा के लिए एक अलग गुरुद्वारा कमेटी बनाने के लिए शिरोमणी कमेटी को तोड़ दिया गया।’’
बीबा बादल ने जोर देकर कहा कि धार्मिक संस्थानों का चलाने के दोहरे मापदंड नही हो सकते। उन्होने कहा,‘‘ अगर केंद्र सरकार को लगता है कि अल्पसंख्यकों के बोर्ड और संस्थानों के प्रबंधन के लिए गैर-मुस्लिम यां गैर-सिखों को नामित करना सही है तो उसे अयोध्या में राम मंदिर की प्रबंधक कमेटी में मुसलमानों को नामित करना चाहिए।’’ बीबा बादल ने पूरे विधेयक की समीक्षा की मांग करते हुए कहा,‘‘ हर अल्पसंख्यक को नौंवें सिख गुरु श्री तेग बहादुर जी द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार अपने संस्थानों के प्रबध्ंान का अधिकार होना चाहिए।’’
























