पंजाब में पराली जलाने के कुल 50 से ज्यादा मामले आये सामने; दर्ज हुई एक FIR
चंडीगढ 30 सिंतबर, 2026 (विश्ववार्ता) अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि मंगलवार तक पूरे पंजाब में धान की पराली जलाने से जुड़ी आग लगने की कुल 52 घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें से 16 मामलों में फसल जलने की फिजिकल पुष्टि हुई है।
इस मामले पर मौजूद सरकारी डेटा के मुताबिक, रिपोर्ट की गई घटनाओं में से 42 की मौके पर ही जांच की गई, जबकि 16 जगहों पर फसल के अवशेष जलाने की फिजिकल पुष्टि हुई। Stubble Burning Reported
जिलेवार डेटा से पता चलता है कि अमृतसर में आग लगने की सबसे ज़्यादा घटनाएं दर्ज की गईं, जहां अब तक 30 मामले सामने आए हैं। इनमें से 20 खेतों की अधिकारियों ने जांच की है और चार जगहों पर फसल जलने के निशान मिले हैं। अधिकारियों ने बताया कि अमृतसर में एक मामले में 5,000 रुपये का एनवायरनमेंटल कंपनसेशन लगाया गया और पूरी रकम बाद में वसूल कर ली गई।
तरनतारन में आग लगने के आठ मामले दर्ज किए गए, इसके बाद फिरोजपुर में पांच, गुरदासपुर में तीन और मोगा में दो मामले दर्ज किए गए। सरकारी डेटा के मुताबिक, फाजिल्का, होशियारपुर, एस.बी.एस. नगर और पटियाला में आग लगने की एक-एक घटना दर्ज की गई।
डेटा यह भी दिखाता है कि राज्य भर में 11 मामलों में एनवायर्नमेंटल कंपनसेशन लगाया गया, जो कुल 55,000 रुपये था। अधिकारियों ने बताया कि इसमें से अब तक 25,000 रुपये वसूल किए जा चुके हैं।
तरनतारन में, बताई गई आठ घटनाओं से जुड़े सभी आठ खेतों का इंस्पेक्शन किया गया। इंस्पेक्शन के दौरान, पांच जगहों पर फसल जलने के संकेत मिले। चार मामलों में 20,000 रुपये का एनवायर्नमेंटल कंपनसेशन लगाया गया, जबकि 10,000 रुपये वसूल किए गए हैं। इसके अलावा, संबंधित खेतों के रिकॉर्ड में पांच ‘रेड एंट्री’ दर्ज की गईं।
फिरोजपुर में, आग लगने की पांच घटनाओं की रिपोर्ट के बाद, सभी पांच खेतों का इंस्पेक्शन किया गया। सभी पांच जगहों पर फसल जलने के संकेत मिले। अधिकारियों ने चार मामलों में 20,000 रुपये का एनवायर्नमेंटल कंपनसेशन लगाया, जिसमें से अब तक 5,000 रुपये वसूल किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने बताया कि खेतों के रिकॉर्ड में चार ‘रेड एंट्री’ भी दर्ज की गईं।
पटियाला में आग लगने की एक घटना सामने आई, जहाँ खेतों के इंस्पेक्शन के दौरान फसल जलने के निशान कन्फर्म हुए। सरकारी डेटा के मुताबिक, इस मामले में 5,000 रुपये का एनवायरनमेंटल कंपनसेशन लगाया गया और इसे FIR दर्ज करने से भी जोड़ा गया है।
कुल डेटा से पता चलता है कि बताई गई घटनाओं के संबंध में एक FIR दर्ज की गई थी। इसके अलावा, खेतों के रिकॉर्ड में नौ ‘रेड एंट्री’ की गईं, जबकि संबंधित लोगों को चार वॉर्निंग नोटिस या कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।
साथ ही, इन घटनाओं के संबंध में नोडल या सुपरवाइजरी अधिकारियों के खिलाफ कोई चार्जशीट या सस्पेंशन की कार्रवाई फाइल नहीं की गई है। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट या सस्पेंशन की कार्रवाई की संख्या ज़ीरो है।
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