आज है धरती मां के महान सपूत शहीदे आजम भगत सिंह का जन्मदिन
पाकिस्तान में है शहीद भगत सिंह का ये पुश्तैनी मकान
दिल्ली, 28 सिंतबर, 2026 (विश्ववार्ता)आज के दिन 28 सितंबर 1907 को जिला लायलपुर (अब फैसलाबाद, पाकिस्तान में) के गांव बावली में जन्मे शहीदे आजम भगत सिंह की आज 111वीं जयंती है। भगत सिंह की जयंती पर उनके 23 साल के उस सफर को याद करना जरूरी है, जो बचपन और परिवार से शुरू होकर क्रांतिकारी विचारों तक पहुंचा। बचपन में भगत सिंह को पढ़ाई के साथ खेतों में समय बिताना पसंद था। उन्होंने अपने बड़े भाई जगत सिंह के साथ बंगा के प्राथमिक स्कूल में पढ़ाई शुरू की। लेकिन 11 साल की उम्र में जगत सिंह की मृत्यु हो गई। इस घटना का भगत सिंह पर गहरा असर पड़ा।
देश की आजादी के लिए लड़ते हुए 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को ब्रिटिश हुकूमत ने फांसी से लटका दिया था। इस बात को करीब 87 साल गुजर गए हैं, लेकिन भगत सिंह आज भी हमारे जेहन में जिंदा हैं। उनका वो घर भी मौजूद है, जहां उनका जन्म हुआ था और जहां उन्होंने अपना बचपन बिताया था। ये मकान अब पाकिस्तान में है। bhagat singh remembering the legend on his 110th birth anniversary
– 28 सितंबर, 1907 को फैसलाबाद जिले के जरांवाला तहसील स्थित बंगा गांव में जन्मे भगत सिंह के पूर्वज महाराजा रणजीत सिंह की सेना में थे। उनके पिता और चाचा गदर पार्टी के सदस्य थे। यह पार्टी ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ क्रांतिकारी आंदोलन चला रही थी।
– इसका असर यह हुआ कि बचपन से ही भगत सिंह में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ गुस्सा भर गया। उन्होंने भी देश की आजादी के लिए क्रांति का रास्ता चुना।- वह हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य बने। इसमें चंद्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल और सुखदेव जैसे महान क्रांतिकारी मौजूद थे।- देश की आजादी के लिए लड़ते हुए भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को ब्रिटिश हुकूमत ने फांसी से लटका दिया था। इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया था।- भगत सिंह और उनके साथियों ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमा था और इंकलाब-जिंदाबाद का नारा बुलंद किया।
पाकिस्तान में है पुश्तैनी घर
– शहीद भगत सिंह का पुश्तैनी घर पाकिस्तान में मौजूद है। उनका जन्म फैसलाबाद के बंगा गांव में चाक नंबर 105 जीबी में हुआ था।
– चार साल पहले इसे हेरिटेज साइट घोषित कर दिया गया था। इसे सरंक्षित करने के बाद दो साल पहले पब्लिक के लिए खोल दिया गया।
जेल में भी पढ़ना और लिखना जारी रखा
भगत सिंह के जीवन में अध्ययन की भूमिका लगातार बनी रही। जेल में भी उन्होंने पढ़ना और लिखना जारी रखा। उन्होंने कम्युनिस्ट साहित्य का अध्ययन किया और आगे चलकर खुद को नास्तिक माना। जेल की कठिन परिस्थितियों में भी उनके विचारों में बदलाव नहीं आया। उन्होंने भारत के क्रांतिकारी आंदोलन का इतिहास लिखने की कोशिश की। इसके लिए उन्होंने बंगाली सीखी और बंगाली क्रांतिकारी साहित्य का अध्ययन किया। फांसी से कुछ समय पहले उन्होंने युवा राजनीतिक कार्यकर्ताओं के नाम एक बयान भी तैयार किया।
भगत सिंह के लिए क्रांति का अर्थ केवल बम और पिस्तौल तक सीमित नहीं था। उनके विचारों में ऐसी सामाजिक व्यवस्था का सवाल भी शामिल था जिसमें मजदूर और किसान शोषण से मुक्त हों और आर्थिक असमानता खत्म हो।
और खबरें पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें: https://wishavwarta.in/
























