
UPI पर MDR चार्ज को लेकर व्यापारियों को भरोसा, ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा बोझ
UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज का विरोध,2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’
नई दिल्ली, 27 सितंबर (वर्ल्ड टॉक) – यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज लागू होने से पहले व्यापारियों ने फाइनेंस मिनिस्ट्री को भरोसा दिलाया है कि इसका बोझ आम ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। बताया गया है कि 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज़्यादा के UPI पेमेंट पर व्यापारियों से 0.4 परसेंट MDR चार्ज लिया जाएगा। इसे लेकर कुछ व्यापारी कह रहे थे कि वे यह चार्ज ग्राहकों से वसूलेंगे।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के नाम से 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने की भी बातें हो रही थीं। हालांकि, CAIT ने फाइनेंस मिनिस्ट्री को लिखकर साफ कर दिया है कि ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है। CAIT के जनरल सेक्रेटरी और BJP MP प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि संगठन देश हित में लिए गए फैसलों के साथ है। CAIT के नेशनल प्रेसिडेंट बीसी भरतिया ने कहा कि कोई भी व्यापारी ग्राहक से MDR चार्ज नहीं वसूल सकता। उनके मुताबिक, सामान की बिक्री MRP पर होती है और इससे ज़्यादा चार्ज करने या बिल करने की इजाज़त नहीं है।
पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने भी UPI पर MDR चार्ज का विरोध करने की बात कही थी। हालांकि, फाइनेंस मिनिस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, डीलरों की मुख्य मांग पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर मार्जिन बढ़ाने से जुड़ी है।
MDR वह फीस है जो डिजिटल पेमेंट लेने वाला व्यापारी बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देता है। यह डिजिटल पेमेंट से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसफर नेटवर्क कॉस्ट के लिए लिया जाता है। छोटे व्यापारियों को राहत देते हुए, एक महीने में 1 लाख रुपये तक का डिजिटल पेमेंट लेने वाले दुकानदारों को MDR से छूट दी गई है।
2000 रुपये से अधिक के UPI मर्चेंट भुगतान पर 15 अक्टूबर से MDR लागू किए जाने के विरोध में चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज (CTI) ने 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का ऐलान किया है। संगठन ने दिल्ली समेत देशभर के दुकानदारों और व्यापारियों से उस दिन UPI QR कोड, स्कैनर और साउंड बॉक्स को काले कपड़े से ढककर नकद भुगतान लेने की अपील की है।
मामले में क्या बोले CTI चेयरमैन बृजेश गोयल
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, अगर 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक UPI पेमेंट पर MDR शुल्क लगाया गया तो देश में फिर से नकदी लेनदेन का प्रचलन बढ़ सकता है। दिल्ली और देश के दुकानदारों, व्यापारियों और MSME सेक्टर ने पूरी तरह से UPI लेनदेन को अपना लिया था, लेकिन अब अगर दुकानदारों, व्यापारियों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ पड़ेगा तो वे फिर से नकदी लेनदेन की ओर लौट सकते हैं और ऐसे में UPI पेमेंट में 50% की गिरावट आ सकती है।
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