
supreme court upholds direction for firs against former cbi officials
संज्ञेय अपराध पर पुलिस तत्काल कार्रवाई करे-Supreme Court
व्यक्तिगत पूर्वाग्रह त्यागकर सत्यनिष्ठा बनाए रखना कर्तव्य-Supreme Court
क्या है पूरा मामला ?
चंडीगढ, 12 सिंतबर (विश्ववार्ता) supreme court ने कहा कि जब पुलिस अधिकारी वर्दी पहनते हैं, तो उन्हें अपनी व्यक्तिगत, धार्मिक, जातीय या अन्य किसी भी तरह की पूर्वाग्रह वाली सोच को पूरी तरह त्याग देना चाहिए और सिर्फ कानून और अपने कर्तव्य के प्रति सच्चे रहना चाहिए। महाराष्ट्र के अकोला में 2023 में हुए साम्प्रदायिक दंगों के दौरान हुई हत्या के मामले में कार्रवाई में लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने का आदेश दिया। अदालत ने महाराष्ट्र पुलिस को फटकार लगाई कि उन्होंने अब तक इस मामले में एफआईआर दर्ज तक नहीं की, जो उनके कर्तव्य में गंभीर चूक है।
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मई 2023 में अकोला के पुराने शहर (ओल्ड सिटी) इलाके में पैगंबर मोहम्मद से जुड़े एक सोशल मीडिया पोस्ट के वायरल होने के बाद साम्प्रदायिक हिंसा भड़क गई। इस हिंसा में विलास महादेव राव गायकवाड़ नाम के व्यक्ति की हत्या हो गई, जबकि 8 लोग घायल हुए, जिनमें याचिकाकर्ता मोहम्मद अफजल मोहम्मद शरीफ भी शामिल थे। शरीफ ने आरोप लगाया कि चार हमलावरों ने विलास गायकवाड़ पर तलवार, लोहे की पाइप और अन्य हथियारों से हमला किया। इसके बाद उन्होंने शरीफ की गाड़ी को तोड़ा और उसके सिर और गर्दन पर वार कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया।
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घायल के बयान पर नहीं दर्ज हुई FIR
इस वारदात में घायल शरीफ को अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां उसका बयान भी पुलिस ने दर्ज किया, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद शरीफ ने अपने पिता के जरिए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।























