
भारत में February 2025 तक 56.75 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों का Registration
रत लिख रहा है हरित परिवहन अभियान नए सिरे से परिवहन की गाथा
Registration of 56.75 lakh electric vehicles by February 2025
चंडीगढ़, 28 अगस्त: (विश्ववार्ता) भारत का हरित परिवहन अभियान नए सिरे से परिवहन की गाथा लिख रहा है, इंजनों की गर्जना को नवाचार की शांत गूंज में बदल रहा है। शहर की सड़कों पर तैरने वाली चमकदार इलेक्ट्रिक बसों से लेकर चार्जिंग पॉइंट के साथ पंक्तिबद्ध राजमार्गों तक, राष्ट्र एक ऐसे नेटवर्क का निर्माण कर रहा है, जहां गति का मिलन टिकाऊ व्यवस्था से होता है।
electric vehicles टू-व्हीलर की बिक्री विगत वर्ष के 9.48 लाख से 21प्रतिशत बढ़कर 11.49 लाख यूनिट
गौरतलब हो, वित्त वर्ष 2024-25 में नए रिकॉर्ड के साथ भारत का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार पूरी गति से आगे बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (e-2W) की बिक्री विगत वर्ष के 9.48 लाख से 21प्रतिशत बढ़कर 11.49 लाख यूनिट हो गई। ये आंकड़े भारतीय सड़कों पर स्वच्छ और अधिक टिकाऊ परिवहन की ओर तीव्र गति से बदलाव का संकेत देते हैं।
यह बदलाव केवल वाहनों के मामले में नहीं है, बल्कि इस दिशा में एक विशिष्ट दृष्टिकोण में भी है। यह परिवहन के अनुकूल परिवेश के निर्माण के संबंध में है जो हमारे पर्यावरणीय लक्ष्यों के अनुरूप है, आर्थिक विकास का समर्थन करता है और रोजमर्रा के जीवन में सुधार लाता है। साहसिक नीतियों, सरकारी-निजी सहयोग और नवाचार के बढ़ते ज्वार के साथ भारत एक स्वच्छ, हरित और अधिक सामर्थ्यवान परिवहन के भविष्य की राह पर अग्रसर है।
एक संपन्न शहर की पहचान
एक संपन्न शहर की पहचान क्या है? बिना शोर किए गुजरने वाले वाहनों के साथ शांत सड़कें, स्वच्छ हवा? खैर, यह भविष्य का दृश्य नहीं है, बल्कि एक ऐसी यात्रा है जो पहले से ही पूरे भारत में चल रही है। परिवहन के स्वच्छ, कम उत्सर्जन वाले और कम ऊर्जा की खपत वाले साधनों के प्रति भारत की पूरी प्रतिबद्धता के कारण हरित परिवहन अच्छी तरह से और सही मायने में, महज चर्चा का विषय होने से आगे बढ़ चुका है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 26 अगस्त 2025 को अहमदाबाद के हंसलपुर संयंत्र में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सुजुकी के पहले वैश्विक बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (बीईवी) “ई विटारा” का उद्घाटन किया जो भारत की हरित परिवहन यात्रा में ऐतिहासिक मील का पत्थर बन गया है। यह 100 से अधिक देशों को मेड-इन-इंडिया बीईवी के निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस दौरान पीएम मोदी ने तोशिबा, डेंसो और सुजुकी के संयुक्त उद्यम टीडीएस लिथियम-आयन बैटरी प्लांट में हाइब्रिड बैटरी इलेक्ट्रोड के स्थानीय उत्पादन का भी उद्घाटन किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि 80 प्रतिशत से अधिक बैटरी भारत में ही निर्मित हो, जिससे “मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड” के साझा लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिल सके। ये ऐतिहासिक घटनाक्रम न केवल भारत को वैश्विक ईवी आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करते हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और स्वच्छ ऊर्जा नवाचार की दिशा में देश की निर्णायक छलांग भी हैं।
फायदों के लिए ऊर्जस्वित
वहीं, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) पारंपरिक ईंधन आधारित परिवहन की जगह स्वच्छ, स्मार्ट और अधिक कुशल विकल्प प्रदान करके यात्रा करने के हमारे तरीके को बदल रहे हैं। जिस तरह भारत टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है तो इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग की ओर बढ़ना व्यावहारिक और भविष्य के लिए तैयार विकल्प बन रहा है।
स्वच्छ परिवहन के लिए सरकार का रोडमैप
हरित परिवहन के क्षेत्र में भारत की गाथा केवल एक राह पर नहीं है बल्कि परिवर्तन को प्रेरित करने वाली साहसिक पहलों के नेटवर्क पर आधारित है। हरित परिवहन की ओर भारत की यात्रा को दूरदर्शी सरकारी योजनाओं की उस श्रृंखला से संचालित किया जा रहा है जो भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं और जिसमें हर एक छोटी यात्रा भी धरती की सेहत बेहतर बनाने की ओर एक कदम है।
राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन योजना और फेम-1
भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी यात्रा को एक स्पष्ट नीति-नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान (एनईएमएमपी) 2020 के शुभारंभ के साथ सरकार से व्यापक तौर पर बढ़ावा मिला। इस योजना को इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने और उनके उत्पादन में तेजी लाने के लिए लागू किया गया था, जो स्वच्छ और हरित परिवहन के भविष्य की नींव रखता है। भारी उद्योग मंत्रालय ने इस मिशन के एक भाग के रूप में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को अपनाने को प्रोत्साहन देने के लिए 2015 से 2019 तक लागू फेम इंडिया स्कीम (फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) की शुरुआत की ताकि उन्हें जनता और उद्योग दोनों के लिए अधिक सुलभ बनाया जा सके। फेम-1 ने न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया बल्कि उनके लिए चार्जिंग के आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित किया। इस बुनियादी ढांचे के निर्माण में सहयोग के लिए 43 करोड़ रुपये के कुल आवंटन के साथ इस योजना के तहत लगभग 520 चार्जिंग स्टेशनों को मंजूरी दी गई थी ।






















